नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल हिंदूराव अस्पताल कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में विभिन्न श्रेणियों के कुल 607 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 227 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 380 पद खाली पड़े हैं। यानी अस्पताल में स्वीकृत पदों में करीब 63 फीसदी रिक्त हैं। इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करना चुनौती बनता जा रहा है।

607 पद लेकिन कर्मचारी सिर्फ 227
अस्पताल में कर्मचारियों की कमी का अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 607 स्वीकृत पदों में से 380 पर कोई कर्मचारी नहीं है। अस्पताल में मरीजों की देखभाल से लेकर विभिन्न चिकित्सा और सहायक सेवाओं को संचालित करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन जरूरी होता है। ऐसे में आधे से ज्यादा पद खाली रहने से कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। हिंदूराव अस्पताल दिल्ली नगर निगम का प्रमुख मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल है। यहां दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी का असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
सबसे ज्यादा नर्सिंग स्टाफ की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में नर्सिंग कर्मचारियों की कमी भी गंभीर है। नर्सिंग से जुड़े सैकड़ों स्वीकृत पदों के मुकाबले काफी कम कर्मचारी उपलब्ध हैं। इसके अलावा तकनीकी और अन्य सहायक कर्मचारियों के पद भी खाली बताए गए हैं। अस्पताल जैसी संस्था में डॉक्टरों के साथ पर्याप्त संख्या में नर्सिंग, तकनीकी और सहायक स्टाफ होना जरूरी होता है। कर्मचारियों की संख्या कम होने से ड्यूटी रोस्टर तैयार करने में भी परेशानी हो सकती है। इमरजेंसी, वार्ड, ओपीडी और अन्य विभागों को चौबीस घंटे संचालित करने के लिए अलग-अलग शिफ्ट में कर्मचारियों की जरूरत होती है।
मरीजों की भीड़ के बीच स्टाफ पर दबाव
हिंदूराव अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी से उपलब्ध स्टाफ को अधिक मरीजों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। अस्पताल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध कर्मचारियों के जरिए सभी विभागों में सेवाएं बनाए रखने की है। स्टाफ की कमी का सीधा संबंध केवल मरीजों के इंतजार से नहीं है। वार्ड प्रबंधन, जांच, रिकॉर्ड, ऑपरेशन थिएटर, दवाओं की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सेवाओं में भी पर्याप्त कर्मचारियों की जरूरत होती है।
खाली पद भरने के लिए निगम को लिखा पत्र
स्टाफ की कमी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने रिक्त पदों को भरने की दिशा में कदम उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल की ओर से दिल्ली नगर निगम को पत्र लिखकर कर्मचारियों की कमी की जानकारी दी गई है और रिक्त पदों को भरने की मांग की गई है। अस्पताल में समय-समय पर डॉक्टरों की भर्ती भी की जाती रही है। नवंबर 2025 में हिंदूराव अस्पताल और उससे जुड़े मेडिकल कॉलेज में विभिन्न विभागों के 34 सीनियर रेजिडेंट पदों पर संविदा भर्ती के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए थे। वहीं अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 में भी गेस्ट फैकल्टी और सीनियर रेजिडेंट से संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं की सूचनाएं दर्ज हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती
380 पद खाली होना अस्पताल प्रशासन और दिल्ली नगर निगम के लिए गंभीर चुनौती है। अगर रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाता है तो मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव कम होने के साथ मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
हिंदूराव जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज बड़ी संख्या में इलाज के लिए आते हैं। इसलिए यहां पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और सहायक कर्मचारी उपलब्ध होना जरूरी है। फिलहाल 607 स्वीकृत पदों में सिर्फ 227 कर्मचारियों का कार्यरत होना और 380 पदों का खाली रहना अस्पताल की मानव संसाधन व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब निगाह दिल्ली नगर निगम पर है कि अस्पताल प्रशासन की मांग के बाद इन खाली पदों को भरने की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।
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