नई दिल्ली। जेन-जी से जुड़े एक कान्क्लेव में कॉकरोच जनता पार्टी के तीन प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपक, आशुतोष रांका और सौरव दास शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान युवाओं से जुड़े मुद्दों और मौजूदा हालात पर चर्चा की गई। इसी दौरान अभिजीत दीपक से दिल्ली में दोबारा मार्च के ऐलान को लेकर सवाल किया गया, जिस पर उन्होंने कहा कि आंदोलन करना उनकी मजबूरी बन गई है।

कार्यक्रम में दीपक से पूछा गया कि क्या आप हर बार बवाल मचाने के लिए दिल्ली आते हैं? दिल्ली आते ही आपने फिर से मार्च का ऐलान कर दिया। इस सवाल के जवाब में दीपक ने कहा कि वह किसी तरह का विवाद खड़ा नहीं करना चाहते, लेकिन परिस्थितियां उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि काफी समय बीत जाने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दीपक ने कहा कि वह लगातार सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील कर रहे हैं कि जिन बच्चों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक मदद का मामला नहीं है, बल्कि उन परिवारों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का सवाल है जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।

दीपक ने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार अपील करने के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो मजबूरी में सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ती है।

कान्क्लेव में शामिल तीनों नेताओं ने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी रोजगार, शिक्षा, मानसिक दबाव और भविष्य की सुरक्षा जैसे कई सवालों से जूझ रही है। ऐसे में युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान करना जरूरी है।

अभिजीत दीपक ने कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों और युवाओं के परिवारों की स्थिति बेहद दुखद है। उन्होंने मांग की कि सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और पीड़ित परिवारों को सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत और संवाद के जरिए समाधान निकलता है तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

वहीं, कार्यक्रम में आशुतोष रांका और सौरव दास ने भी युवाओं की भागीदारी और उनकी समस्याओं को लेकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी युवा है और उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

जेन-जी कान्क्लेव में हुई इस चर्चा के बाद एक बार फिर युवाओं से जुड़े आंदोलन और उनकी मांगों को लेकर बहस तेज हो गई है। दीपक के बयान ने साफ कर दिया है कि उनकी टीम अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। उनका कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वह अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा क्या होगी, यह सरकार के रुख और बातचीत की संभावनाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल अभिजीत दीपक के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा बढ़ गई है।

Tags: