New Delhi. नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। खड़गे ने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने पार्टी नेताओं से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के मुद्दे पर सक्रिय संघर्ष करने का आह्वान किया। खड़गे के आरोपों को चुनाव आयोग ने पहले खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
खड़गे ने बैठक में आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने CEC के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। ये कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं; चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से हुए। हाल के दिनों में चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा पिछले करीब दस महीनों में कई मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें नए मतदाताओं के लिए Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया तथा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर के संचालन से जुड़े मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार कुछ आपत्तियों में प्रक्रियाओं को अनधिकृत या नियमों के विपरीत बताया गया था।
खड़गे ने युवाओं के मताधिकार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में मतदान की न्यूनतम आयु 21 साल से घटाकर 18 साल किए जाने का उल्लेख किया और आरोप लगाया कि Form-6 से जुड़े बदलावों से पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए परेशानी पैदा हुई। Form-6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से संबंधित अतिरिक्त सवाल जोड़े जाने को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने भी आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules के तहत निर्धारित फॉर्म लागू होंगे और SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ मामलों की समीक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी द्वारा पूर्व में मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए जाने का भी जिक्र किया। खड़गे ने कहा कि महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र के मामलों में डुप्लीकेट नाम, संदिग्ध पते, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और Form-6 के इस्तेमाल जैसे मुद्दे उठाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि इन शिकायतों पर समय रहते गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर सवाल कम होते।
खड़गे ने चुनाव आयोग के सामने पांच मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बड़े स्तर पर किए गए बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए। मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को स्पष्ट सूचना और अपील का अवसर दिया जाए। राजनीतिक दलों को आवश्यक चुनावी डेटा सरल और उपयोगी प्रारूप में समय पर उपलब्ध कराया जाए। गंभीर विसंगतियों के मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले किस स्तर पर लिए गए और आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों का समाधान कैसे किया गया। इसी विषय से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में CEC की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। मामला अभी न्यायिक विचाराधीन है और अदालत ने इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि आयोग के तीनों सदस्यों की अलग-अलग टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग के मुताबिक पिछले एक वर्ष में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। आयोग ने SIR प्रक्रिया में घर-घर दस्तावेज एकत्र करने, ECINet प्रणाली की समीक्षा और प्रक्रियागत सुधारों से जुड़े कई फैसलों की भी घोषणा की है। खड़गे ने CWC बैठक में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं मानती। उन्होंने मताधिकार को संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल हिस्सा बताते हुए पार्टी से इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक आवाज उठाने को कहा। आने वाले राज्यों के चुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पार्टी संगठन से मतदाता सूची की प्रक्रिया पर निगरानी रखने और किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार से जुड़े मामले को उठाने को कहा।