
भुवनेश्वर। ओडिशा में बाढ़ के कारण कई जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं। राज्य सरकार ने पिछले चार दिनों के दौरान निचले और प्रभावित इलाकों से करीब 1.4 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
इस बीच राज्य के 74 और तटीय गांवों को सोमवार 28 सितंबर को यूनेस्को-आईओसी कार्यक्रम के तहत ‘सुनामी रेडी’ घोषित किया गया। इसके साथ ही ओडिशा में इस श्रेणी में शामिल गांवों की कुल संख्या बढ़कर 100 हो गई है।
अधिकारियों के अनुसार यह मान्यता नेशनल सुनामी रेडी बोर्ड और ओडिशा सरकार की बैठक के बाद दी गई। इससे पहले बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, पुरी और जगतसिंहपुर जिलों के कई तटीय गांवों का क्षेत्रीय सत्यापन किया गया था।
बैठक की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र के निदेशक बालकृष्णन नायर और ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक राजेश प्रभाकर पाटिल ने की।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि 7,834 गांवों और 1,360 ग्राम पंचायतों के निचले क्षेत्रों से करीब 1.4 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा 38 शहरी स्थानीय निकायों के 219 वार्ड भी बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
राज्य के उत्तरी जिलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। बालासोर, भद्रक, जाजपुर और मयूरभंज में बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है। स्वर्णरेखा, बुधबलंग, जलका, बैतरणी और सालंदी नदियों के साथ उनकी सहायक नदियों में बढ़े जलस्तर के कारण कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
राज्य सरकार ने सुनामी के खतरे वाले 381 तटीय गांवों और बस्तियों की भी पहचान की है। इन गांवों को चरणबद्ध तरीके से सुनामी से निपटने के लिए तैयार करने की योजना बनाई गई है।
यूनेस्को के अंतर सरकारी महासागरीय आयोग का ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम समुदाय आधारित आपदा तैयारी से जुड़ी पहल है। इसके तहत तटीय क्षेत्रों में चेतावनी व्यवस्था, सुरक्षित निकासी, जनजागरूकता और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़ी तैयारियों को मजबूत किया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, स्थानीय समुदायों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि सुनामी जैसी आपदा की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
फिलहाल राज्य प्रशासन का मुख्य ध्यान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने पर है। प्रभावित जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।





