बेंगलुरु: हैदराबाद के बाद अब बेंगलुरु के एक लॉ कॉलेज में भी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने को लेकर विरोध सामने आया है। कुछ छात्रों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कॉलेज प्रशासन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है।
छात्रों का कहना है कि किसी भी न्यायिक पदाधिकारी को लेकर कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संस्थान को सभी पक्षों की भावनाओं और विचारों को ध्यान में रखना चाहिए। विरोध कर रहे छात्रों ने कार्यक्रम की प्रक्रिया और आयोजन के उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए हैं।
विरोध करने वाले छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि लॉ संस्थानों में होने वाले कार्यक्रमों में पारदर्शिता और सभी विचारों को जगह मिलनी चाहिए। हालांकि, कार्यक्रम समर्थक पक्ष का कहना है कि न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का छात्रों के बीच संवाद होना कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
इससे पहले हैदराबाद के एक लॉ कॉलेज में भी CJI को आमंत्रित किए जाने को लेकर विवाद सामने आया था। वहां भी कुछ छात्रों ने कार्यक्रम का विरोध किया था और अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस तरह के मामलों ने शैक्षणिक संस्थानों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संस्थागत निर्णय और न्यायपालिका से संवाद जैसे मुद्दों पर बहस को तेज कर दिया है।
कानून के छात्रों का कहना है कि कॉलेजों में होने वाले कार्यक्रमों का उद्देश्य ज्ञान और संवाद को बढ़ावा देना होना चाहिए। वहीं, संस्थानों का तर्क है कि न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों से बातचीत छात्रों के लिए सीखने का बड़ा अवसर होती है। फिलहाल बेंगलुरु के इस मामले में आगे की स्थिति कॉलेज प्रशासन और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
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