SIR विवाद पर चुनाव आयोग की सफाई के बाद NDA का विपक्ष पर हमला, आयोग ने लिए अहम फैसले
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग के शनिवार के बयान के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई घटक दलों ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। जदयू, लोजपा (रामविलास), तेलुगु देशम पार्टी और शिवसेना समेत एनडीए के नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग ने SIR और आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़े सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
चुनाव आयोग ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मौजूदगी में बैठक की। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव, सवाल या राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अंतिम फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए।
इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर सहमति नहीं थी। आयोग के स्पष्टीकरण के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। यह एनडीए नेताओं का राजनीतिक पक्ष है, जबकि विपक्ष SIR की प्रक्रिया और आयोग के कामकाज पर लगातार सवाल उठाता रहा है।
लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी आयोग के स्पष्टीकरण के बाद प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से अपेक्षा थी कि वह SIR और इससे जुड़े विवादों पर सभी पहलुओं को स्पष्ट करे। इससे पहले चिराग ने कहा था कि जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई संदेह पैदा होता है तो चुनाव आयोग को उसे दूर करना चाहिए।
चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी स्थिति सामने रखी है। उन्होंने विपक्ष पर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। हालांकि आयोग के बयान से पहले चिराग पासवान सहित एनडीए के कुछ सहयोगी नेताओं ने भी चुनाव आयोग से विवाद पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का समर्थन किया। वहीं शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष के आरोपों की आलोचना की। एनडीए नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग के बयान के बाद SIR को लेकर आयोग के भीतर मतभेद होने के विपक्ष के दावों पर स्थिति स्पष्ट हुई है।
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा और अपनी कार्यप्रणाली से जुड़े कई निर्णय भी लिए हैं। इनमें SIR के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं को राहत देने वाला फैसला प्रमुख है। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किया गया है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में ERO या AERO कार्यालय में उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी।
ऐसे मतदाताओं के घर बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO पहुंचेंगे और जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके बाद दस्तावेज ECINet पर अपलोड किए जाएंगे और संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी उन पर निर्णय करेगा। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सुनवाई की आवश्यकता होगी और ऐसी सुनवाई को भी जहां संभव हो ऑनलाइन करने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
इसके अलावा आश्रय गृहों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने का फैसला किया गया है। इसका उद्देश्य उन लोगों को मतदाता सूची संबंधी प्रक्रिया में मदद उपलब्ध कराना है, जिन्हें दस्तावेज या आवेदन प्रक्रिया में परेशानी हो सकती है।
चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet की समीक्षा कराने का भी निर्णय लिया है। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति इसकी समीक्षा करेगी। इसमें एक स्वतंत्र IIT या IIIT विशेषज्ञ को भी शामिल किए जाने की बात कही गई है। समिति यह देखेगी कि डिजिटल प्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रही है या नहीं।
आयोग के आंतरिक कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैठकों से जुड़ी प्रक्रिया में भी बदलाव का फैसला किया गया है। आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से सदस्यों के साथ साझा किया जाएगा और बैठक के विवरण को भी दर्ज करने की व्यवस्था की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय किया गया है जब चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों और कुछ प्रशासनिक फैसलों को लेकर मीडिया रिपोर्ट सामने आई थीं।
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा में भी बदलाव किया है। आयोग का कहना है कि SIR के दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो सके हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति से जुड़ी रिपोर्टें हैं। आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि विभिन्न विषयों पर सदस्यों के बीच चर्चा और अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार SIR सहित अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
दूसरी ओर विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष के आरोपों और एनडीए के जवाब के कारण यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना हुआ है। आयोग ने कहा है कि वह संविधान के तहत मिली जिम्मेदारियों को निष्पक्षता और निष्ठा के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शनिवार की बैठक और उसके बाद सामने आए फैसलों से आयोग ने एक तरफ मतदाताओं की सुविधा से जुड़े बदलाव किए हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने आंतरिक निर्णयों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की है। एनडीए के घटक दलों ने इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्ष पर हमला तेज किया है, जबकि SIR को लेकर राजनीतिक बहस अभी जारी है।