नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विजयादशमी के अवसर पर भव्य रावण दहन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। द्वारका सेक्टर-10 स्थित रामलीला मैदान में द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की ओर से आयोजित 15वीं रामलीला का समापन 20 अक्टूबर को विशाल रावण दहन के साथ होगा। इस वर्ष आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला है। आयोजकों की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने और रावण दहन करने की जानकारी दी गई है। हालांकि, राष्ट्रपति की उपस्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। आयोजन के लिए रामलीला के मंच को सोमनाथ मंदिर की थीम पर सजाया गया है। इसके साथ ही इस बार नई पीढ़ी के कलाकार रामायण के विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रहे हैं।

रामलीला सोसायटी के चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक आकाश राजेश गहलोत के अनुसार, आयोजन का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ना है। इस वर्ष रामलीला में आधुनिक तकनीक, भव्य सजावट और पारंपरिक मंचन का विशेष संगम देखने को मिल रहा है।

221 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन

द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित रामलीला में इस वर्ष 221 फीट ऊंचा रावण का विशाल पुतला तैयार किया गया है।

आयोजकों के अनुसार, यह इस वर्ष देश के सबसे ऊंचे रावण पुतलों में शामिल होने का दावा रखता है। पुतले को तैयार करने में विशेष तकनीक और कारीगरी का इस्तेमाल किया गया है।

रामलीला सोसायटी ने अगस्त में ही विशाल रावण पुतले के निर्माण की घोषणा कर दी थी। आयोजकों का उद्देश्य पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार रावण दहन को और भव्य बनाना है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के शामिल होने की जानकारी

आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को रावण दहन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना है।

कार्यक्रम में उनकी प्रस्तावित उपस्थिति को लेकर आयोजकों में उत्साह है। राष्ट्रपति के शामिल होने की स्थिति में यह आयोजन द्वारका की रामलीला के लिए विशेष अवसर होगा।

हालांकि, राष्ट्रपति भवन के सार्वजनिक कार्यक्रम संबंधी आधिकारिक स्रोत से उनकी उपस्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी है।

सोमनाथ मंदिर की थीम पर सजाया गया मंच

इस वर्ष रामलीला के लिए तैयार किया गया मंच विशेष आकर्षण का केंद्र है। आयोजकों ने इसे गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की थीम पर सजाया है।

मंच की सजावट में धार्मिक स्थापत्य कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी गई है।

सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है।

आयोजकों का प्रयास है कि मंच की सजावट के माध्यम से दर्शकों को भारतीय मंदिरों की स्थापत्य परंपरा से परिचित कराया जा सके।

जेन जी कलाकार निभा रहे रामायण के पात्र

रामलीला सोसायटी के चेयरमैन आकाश राजेश गहलोत ने बताया कि इस वर्ष युवा पीढ़ी, विशेष रूप से जेन जी से जुड़े कलाकार रामायण के विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रहे हैं।

उनके अनुसार, रामलीला में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना आयोजन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

युवा कलाकार भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण और अन्य पात्रों के माध्यम से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन कर रहे हैं।

सोसायटी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष 120 से अधिक कलाकार रामलीला में भाग ले रहे हैं।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की पहल

आकाश राजेश गहलोत के अनुसार, रामलीला का उद्देश्य केवल धार्मिक कथा का मंचन करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से परिचित कराना भी है।

रामायण में मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सत्य और परिवार के प्रति समर्पण जैसे आदर्शों को विशेष महत्व दिया गया है।

युवा कलाकारों की भागीदारी से इन संदेशों को उनकी अपनी पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कथाओं का संयोजन युवाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति रुचि बढ़ा सकता है।

तीन महीने की मेहनत से तैयार हुआ रावण

इस वर्ष 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले को तैयार करने के लिए कारीगरों ने लगभग तीन महीने तक काम किया।

पुतले के निर्माण पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।

रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के लगभग 90 फीट ऊंचे पुतले भी तैयार किए गए हैं।

विशाल पुतलों को खड़ा करने और उनके दहन की तैयारी में तकनीकी व्यवस्था का विशेष महत्व है।

आधुनिक तकनीक से होगा रावण दहन

इस वर्ष रावण दहन में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है।

आयोजकों ने विशाल पुतले के दहन के लिए रिमोट आधारित व्यवस्था का उल्लेख किया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षित दूरी से दहन प्रक्रिया संचालित करना और विशाल पुतले के आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना है।

इतने बड़े पुतले के दहन के दौरान सुरक्षा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और अग्निशमन संबंधी सावधानियां महत्वपूर्ण होती हैं।

11 अक्टूबर से चल रही रामलीला

द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की 15वीं रामलीला का आयोजन 11 अक्टूबर से शुरू हुआ था।

इस दौरान भगवान राम के जन्म, सीता स्वयंवर, वनवास, भरत मिलाप, सीता हरण, लंका दहन और रामसेतु निर्माण सहित रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया।

19 अक्टूबर को रामसेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और संजीवनी बूटी से जुड़े प्रसंगों का मंचन निर्धारित है।

20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन भगवान राम और रावण के बीच अंतिम युद्ध तथा रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क प्रवेश

द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रामलीला कार्यक्रम में दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है।

सोसायटी ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले परिवारों और श्रद्धालुओं के लिए रामलीला मैदान में आयोजन की व्यवस्था की है।

रामलीला के मंचन के माध्यम से दर्शकों को रामायण की कथा और उससे जुड़े विभिन्न प्रसंग देखने का अवसर मिल रहा है।

दिल्ली में विजयादशमी को लेकर उत्साह

राजधानी दिल्ली में विजयादशमी का त्योहार हर वर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस अवसर पर विभिन्न रामलीला समितियां धार्मिक नाटकों और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

द्वारका सेक्टर-10 का आयोजन अपने विशाल पुतलों और भव्य मंच के कारण प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गया है।

221 फीट ऊंचा रावण का पुतला, सोमनाथ मंदिर की थीम पर मंच और युवा कलाकारों की भागीदारी इस वर्ष के आयोजन को विशेष बना रहे हैं।

विजयादशमी पर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश

रामलीला का समापन विजयादशमी पर रावण दहन के साथ होता है। यह परंपरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है।

द्वारका श्री रामलीला सोसायटी के आयोजकों का कहना है कि रामलीला के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों को समाज, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

20 अक्टूबर को प्रस्तावित भव्य रावण दहन के साथ दस दिवसीय आयोजन का समापन होगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और रामायण के संदेश से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

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