Gen Z वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी सोशल मीडिया पर मंत्रियों के काम का स्कोरकार्ड पेश
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के युवा मतदाताओं, खासकर जेन ज़ेड (Gen Z) पीढ़ी तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों पर फोकस तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा की गई और उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम का स्कोरकार्ड भी पेश किया गया।
बैठक में मंत्रियों की सोशल मीडिया पर सक्रियता, लोगों के साथ उनके संवाद, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और डिजिटल माध्यमों के जरिए जनता तक पहुंच बनाने के प्रयासों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करना है।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक में हर मंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट की पहुंच, लोकप्रियता और जनता से जुड़ाव से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इसमें यह देखा गया कि मंत्री किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं एवं नीतियों की जानकारी लोगों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि देश की युवा आबादी तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है। ऐसे में सोशल मीडिया युवाओं तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम बन गया है। खासतौर पर जेन ज़ेड वर्ग के युवा समाचार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं।
इसी रणनीति के तहत अब केंद्रीय मंत्रियों को युवाओं के साथ सीधा संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। योजना के अनुसार, अब हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी न किसी विश्वविद्यालय का दौरा करेगा और छात्रों से बातचीत करेगा।
इन दौरों का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं होगा, बल्कि युवाओं की राय और उनकी समस्याओं को समझना भी होगा। मंत्री छात्रों के साथ संवाद के दौरान देश के विकास, रोजगार, शिक्षा, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
सरकार की योजना के तहत विश्वविद्यालयों में होने वाले इन कार्यक्रमों में छात्रों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास परियोजनाओं और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही युवाओं से सुझाव भी लिए जाएंगे।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि युवा मतदाता देश की राजनीति में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण राजनीतिक दल अब युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए डिजिटल रणनीतियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
जेन ज़ेड पीढ़ी में बड़ी संख्या में ऐसे युवा शामिल हैं जो पहली बार या हाल के वर्षों में मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बने हैं। ऐसे मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए सरकार और राजनीतिक संगठन नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्रियों के विश्वविद्यालय दौरों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आमने-सामने संवाद के जरिए सरकार युवाओं की सोच, उनकी अपेक्षाओं और मुद्दों को समझने की कोशिश करेगी।
कैबिनेट बैठक में सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा को भी इसी डिजिटल रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि मंत्री केवल नीतियों की घोषणा तक सीमित न रहें, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए लोगों से लगातार जुड़े रहें।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रियता अब सार्वजनिक संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी खुद सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल करते हैं और समय-समय पर विभिन्न वर्गों से डिजिटल माध्यमों के जरिए संवाद करते रहे हैं।
सरकार की नई पहल के तहत मंत्रियों को सोशल मीडिया पर अधिक प्रभावी तरीके से अपनी गतिविधियां साझा करने, युवाओं से जुड़ने और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया आज राजनीतिक संवाद का बड़ा माध्यम बन चुका है। युवा वर्ग पारंपरिक माध्यमों की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक सक्रिय है, इसलिए सरकारें और राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।
केंद्र सरकार की यह पहल आने वाले समय में युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने और सरकारी नीतियों को सीधे उन तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
अब देखना होगा कि केंद्रीय मंत्रियों के विश्वविद्यालय दौरे और सोशल मीडिया रणनीति से सरकार युवाओं के साथ किस तरह का जुड़ाव स्थापित कर पाती है।