नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बनकर एम्स (AIIMS) में प्राथमिकता के आधार पर इमरजेंसी इलाज कराने का दबाव बनाने के आरोप में दक्षिण दिल्ली के एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने खुद को प्रधानमंत्री का ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) बताकर AIIMS के अधिकारियों से संपर्क किया और विशेष सुविधा देने की मांग की।
CBI ने यह कार्रवाई PMO की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संगम विहार निवासी रवि कांत शर्मा ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा अधिकारी बताया और एम्स के प्रोटोकॉल अधिकारी बी.एन. आचार्य पर दबाव बनाया।
जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने किस तरह खुद को सरकारी अधिकारी बताया, किन लोगों से संपर्क किया और क्या उसने पहले भी इस तरह की कोशिश की है।
PMO की शिकायत पर CBI की कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, PMO को जानकारी मिली थी कि एक व्यक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम का इस्तेमाल कर एम्स में इलाज से जुड़ी प्राथमिकता हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
इसके बाद PMO की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में कहा गया कि रवि कांत शर्मा ने खुद को प्रधानमंत्री के OSD के रूप में पेश किया और AIIMS प्रशासन से इमरजेंसी इलाज की व्यवस्था कराने के लिए संपर्क किया।
CBI ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया है। एजेंसी अब आरोपी की भूमिका और उसके दावों की सत्यता की जांच कर रही है।
AIIMS अधिकारी पर दबाव बनाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने AIIMS के प्रोटोकॉल अधिकारी बी.एन. आचार्य से संपर्क किया था। आरोप है कि उसने अपनी पहचान PMO अधिकारी के रूप में बताकर मरीज के लिए प्राथमिकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराने का दबाव बनाया।
AIIMS जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल और नियम होते हैं। किसी भी मरीज को विशेष सुविधा देने के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना होता है।
CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने इन नियमों को दरकिनार करने के लिए किस तरह सरकारी पद का कथित रूप से इस्तेमाल किया।
फर्जी पहचान का इस्तेमाल जांच के घेरे में
जांच एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी किसी सरकारी संस्था या अधिकारी के सामने अपनी पहचान गलत तरीके से पेश की थी।
CBI यह पता लगाएगी कि आरोपी ने PMO अधिकारी होने का दावा किस उद्देश्य से किया था और क्या इसके पीछे कोई अन्य मकसद था।
इसके अलावा आरोपी के मोबाइल रिकॉर्ड, संपर्कों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
सरकारी पदों के दुरुपयोग पर सख्ती
सरकारी पदों और संस्थानों के नाम का गलत इस्तेमाल करने के मामलों में जांच एजेंसियां लगातार सख्ती बरत रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी पहचान का फर्जी इस्तेमाल करना गंभीर अपराध है।
PMO जैसे संवेदनशील कार्यालय का नाम लेकर किसी सरकारी संस्था पर दबाव बनाना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
AIIMS में इलाज के लिए होती है तय प्रक्रिया
AIIMS देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है, जहां देशभर से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में इमरजेंसी और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित नियम और व्यवस्थाएं हैं।
अस्पताल प्रशासन मरीज की स्थिति के आधार पर इलाज की प्राथमिकता तय करता है। किसी बाहरी दबाव या गलत पहचान के जरिए व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाता है।
CBI जांच जारी
फिलहाल CBI ने आरोपी रवि कांत शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी आरोपी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि आरोपी ने केवल इलाज की प्राथमिकता हासिल करने के लिए ऐसा किया या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या अन्य उद्देश्य था।
सरकारी संस्थानों और अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी CBI की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।