नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित ध्वजारोहण समारोह के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) समेत कई राष्ट्रवादी संगठनों ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से दी गई सफाई के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।

विवाद की शुरुआत एक कथित वीडियो सामने आने के बाद हुई, जिसमें कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर सवाल उठाए गए। वीडियो सामने आने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और हिंदू संगठनों ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

भाजपा और विहिप नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के पूर्ण स्वरूप का सम्मान नहीं किया और केवल शुरुआती हिस्से का गायन किया। उनका कहना है कि राष्ट्रगीत के सभी हिस्से भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़े हुए हैं।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो छंदों तक सीमित रही है और इसके आगे के हिस्सों में आने वाले शब्दों की अनदेखी करती रही है।

विनोद बंसल ने कहा कि राष्ट्रगीत के आगे के हिस्सों में ‘दुर्गा’, ‘विद्या’, ‘शक्ति’ और ‘भक्ति’ जैसे शब्द भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन शब्दों को नजरअंदाज करना केवल राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक भावनाओं की अनदेखी है।

विहिप ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े गीतों के प्रति सभी राजनीतिक दलों को समान सम्मान दिखाना चाहिए।

भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। उनका कहना है कि राष्ट्रगीत किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की भावनाओं और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस मामले पर सफाई दी गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी हमेशा देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों का सम्मान करती रही है।

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर पार्टी ने हमेशा देशभक्ति और संविधान के मूल्यों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और अन्य संगठन इस मुद्दे को बेवजह विवाद का रूप दे रहे हैं।

विवाद के बीच ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास और इसके महत्व को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में इसे भारत के राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाते हैं। ऐसे मामलों में राजनीतिक दल अपनी-अपनी विचारधारा के आधार पर प्रतिक्रिया देते हैं।

इस मामले में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा जहां इसे राष्ट्र सम्मान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक विवाद बताकर खारिज कर रही है।

विहिप समेत अन्य संगठनों ने कांग्रेस से इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय गीतों और प्रतीकों के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, क्योंकि दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे इस पर अपनी-अपनी स्थिति मजबूती से रख रहे हैं।

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