रामपुर से दिल्ली तक गरमाई सियासत जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रदर्शन की तैयारी
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़े मामलों को लेकर अब सियासी लड़ाई दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचने की तैयारी में है। आजम खान के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी, कानूनी मामलों और रामपुर स्थित **मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी** को लेकर चल रही कार्रवाई के विरोध में रविवार को प्रदर्शन का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट के मुताबिक, यह आंदोलन जंतर-मंतर पर तीन घंटे तक चलेगा। हालांकि इन वायरल पोस्ट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक, आजम खान समर्थकों की ओर से 30 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन न्याय, अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर क्यों बढ़ा विवाद
रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाती है। पिछले कुछ समय से यह यूनिवर्सिटी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने कई भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण बताते हुए कार्रवाई के आदेश जारी किए थे।
प्रशासन की ओर से यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों को लेकर ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी से जुड़े छात्रों और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया।
आजम खान समर्थकों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
आजम खान और परिवार पर कानूनी संकट
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था। इसी मामले के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें बढ़ीं।
आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के चुनाव लड़ने के लिए अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया गया। मामले में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी।
समर्थकों ने कहा लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे आवाज
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन को लेकर समर्थकों की ओर से कहा जा रहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे। सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि न्याय और अधिकारों की मांग उठाना है।
समर्थकों का कहना है कि आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि शिक्षा और संस्थानों से जुड़े मुद्दों के रूप में भी समझना चाहिए।
सपा ने भी उठाया है मुद्दा
समाजवादी पार्टी पहले भी जौहर यूनिवर्सिटी मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साध चुकी है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रही है।
सपा का कहना है कि जौहर यूनिवर्सिटी एक शैक्षणिक संस्थान है और इसके खिलाफ कार्रवाई से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। वहीं सरकार और प्रशासन का पक्ष है कि कानून सभी के लिए समान है और नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई जरूरी है।
प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक टकराव
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद अब केवल रामपुर तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। भाजपा और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।
भाजपा जहां इसे कानून के पालन से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं सपा इसे राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर नजर
रविवार को होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस और प्रशासन की नजर रहेगी। जंतर-मंतर पर अक्सर राजनीतिक और सामाजिक संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं।
अगर बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचते हैं तो सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आंदोलन कितना बड़ा रूप लेता है और इसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या सामने आती है।