बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा को यादगार बनाना चाहते हैं पीएम मोदी: उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी
नई दिल्ली/ढाका। भारत और बांग्लादेश के बीच जारी कूटनीतिक हलचल के बीच भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा यादगार साबित हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के नेताओं के बीच मजबूत होते संबंधों का सबसे बड़ा लाभ भारत और बांग्लादेश की जनता को मिलेगा।
दिनेश त्रिवेदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। दोनों देशों के बीच हाल के समय में कुछ मुद्दों को लेकर तनाव भी देखने को मिला है, जिसमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग प्रमुख है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर जोर
भारत के उच्चायुक्त ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा जुड़ाव दोनों देशों के आम लोगों से है। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग से व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, सुरक्षा और विकास के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए जरूरी हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर बनी हुई है स्थिति
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सितंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में उनकी भागीदारी को लेकर चर्चा चल रही है।
यदि यह यात्रा होती है तो इसे दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य दिशा में आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
शेख हसीना प्रत्यर्पण मुद्दे पर तनाव
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर ढाका की ओर से भारत से प्रत्यर्पण की मांग की गई है। इस मुद्दे ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत को प्रभावित किया है।
भारत ने इस मामले पर अपनी स्थिति को लेकर कई बार स्पष्ट किया है कि सभी मामलों को कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं के तहत देखा जाएगा। वहीं, बांग्लादेश इस मुद्दे को लगातार उठाता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के संबंधों में कुछ मतभेद जरूर हैं, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए संवाद बनाए रखना दोनों के हित में है।
पीएम मोदी का पड़ोसी देशों पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। भारत ने बांग्लादेश के साथ पिछले वर्षों में सड़क, रेल, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम किया है।
भारत का मानना है कि मजबूत द्विपक्षीय संबंधों से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोग को फायदा मिलेगा। इसी दृष्टिकोण के तहत भारत लगातार बांग्लादेश के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
जनता के हित में संबंध मजबूत करने की अपील
दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों का अंतिम उद्देश्य जनता का कल्याण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, जिन्हें और मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देश आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। उनका कहना था कि सकारात्मक बातचीत और सहयोग से सभी मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है।
कूटनीतिक स्तर पर बढ़ी सक्रियता
तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को लेकर दोनों देशों के राजनयिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान यदि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात होती है तो यह कई मुद्दों पर बातचीत का अवसर प्रदान कर सकती है।
हालांकि, अभी यात्रा को लेकर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। लेकिन भारत की ओर से दिए गए सकारात्मक संकेत यह बताते हैं कि नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाए रखने के पक्ष में है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश मौजूदा मतभेदों को किस तरह दूर करते हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को किस दिशा में आगे ले जाते हैं।