PM मोदी के Facebook वीडियो ब्लॉक मामले में Meta को संसदीय समिति की चेतावनी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को कुछ घंटों के लिए ब्लॉक किए जाने के मामले में विवाद बढ़ गया है। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए Meta को चेतावनी दी है। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा है कि यदि Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो कंपनी को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
यह मामला NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक Facebook वीडियो से जुड़ा है। बताया गया कि Meta के ऑटोमेटेड सिस्टम ने प्रधानमंत्री के इस वीडियो को करीब पांच घंटे तक ब्लॉक कर दिया था। वीडियो में प्रधानमंत्री देश के युवाओं को संबोधित कर रहे थे और प्रश्न पत्र लीक जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा दे रहे थे।
Meta की ओर से बाद में इस घटना को तकनीकी गड़बड़ी बताया गया। कंपनी के प्रतिनिधियों ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह समस्या ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम की गलती के कारण हुई और इसके लिए खेद जताया गया। हालांकि, संसदीय समिति ने इसे केवल तकनीकी समस्या मानने से इनकार किया है।
समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है और ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी देश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक संदेश को इस तरह रोका जाना सामान्य तकनीकी त्रुटि नहीं माना जा सकता।
उन्होंने Meta को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कंपनी के प्रमुख की ओर से सार्वजनिक माफी नहीं आती है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है सेफ हार्बर सुरक्षा?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कुछ परिस्थितियों में उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा मिलती है। हालांकि, इसके लिए प्लेटफॉर्म को कानून और सरकारी निर्देशों का पालन करना होता है।
इस सुरक्षा के कारण सोशल मीडिया कंपनियां आमतौर पर उपयोगकर्ताओं की हर पोस्ट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं मानी जातीं। लेकिन यदि प्लेटफॉर्म नियमों का उल्लंघन करते हैं या निर्धारित जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करते, तो इस सुरक्षा को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
संसदीय समिति का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए। समिति ने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आधिकारिक संदेशों के साथ ऐसी घटनाएं चिंता पैदा करती हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री मोदी के Facebook अकाउंट से साझा किए गए वीडियो को अचानक उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं दिखाया गया। वीडियो ब्लॉक होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे।
Meta ने बाद में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कंपनी के सिस्टम में आई तकनीकी समस्या के कारण ऐसा हुआ। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि समस्या का समाधान कर दिया गया है और वीडियो दोबारा उपलब्ध करा दिया गया।
हालांकि, संसदीय समिति का मानना है कि केवल तकनीकी खराबी बताकर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। समिति ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज राजनीतिक संवाद, सरकारी संदेश और सार्वजनिक बहस का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक संदेश के अस्थायी रूप से हटने या ब्लॉक होने पर विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है।
इस मामले में अब निगाहें Meta की अगली प्रतिक्रिया पर हैं। यदि कंपनी की ओर से कोई औपचारिक कदम उठाया जाता है या मार्क जुकरबर्ग इस मुद्दे पर बयान देते हैं, तो यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल संसदीय समिति ने साफ कर दिया है कि वह सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के पक्ष में है और ऐसे मामलों को केवल तकनीकी त्रुटि के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।