नई दिल्ली। महज सात साल की उम्र में पोलियो ने उनके पैरों की ताकत छीन ली, लेकिन हौसलों को कमजोर नहीं कर सका। व्हीलचेयर पर बैठकर उन्होंने ऐसे सपने देखे, जिन्हें पूरा करना आसान नहीं था। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सुबह छह बजे से शुरू होने वाला अभ्यास और वर्षों की मेहनत उन्हें अंतरराष्ट्रीय खेलों के मंच तक ले गई। यह कहानी है भारत के दिग्गज पैरा एथलीट नीरज यादव की, जिन्होंने एशियन पैरा गेम्स में तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। हालांकि, इस प्रेरणादायक सफर का दुखद अंत हो गया। 42 वर्षीय नीरज यादव की 27 अक्टूबर 2026 की रात दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सात साल की उम्र में पोलियो ने बदल दी जिंदगी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखने वाले नीरज यादव का जन्म 10 फरवरी 1984 को हुआ था। बचपन में वह सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद में रुचि रखते थे, लेकिन सात साल की उम्र में उन्हें पोस्ट-पोलियो रेसिडुअल पैरालिसिस हो गया।
इस बीमारी के कारण उनके शरीर के निचले हिस्से की क्षमता प्रभावित हुई और उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।
शारीरिक चुनौतियों के बावजूद नीरज ने खेलों से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा। उनका मानना था कि खेल के जरिए वह अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
परिवार की खेल पृष्ठभूमि ने भी उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पिता कुश्ती और वॉलीबॉल से जुड़े रहे थे। इसी माहौल ने नीरज को खेलों की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
व्हीलचेयर टेनिस से शुरू हुआ खेलों का सफर
नीरज यादव ने अपने खेल करियर की शुरुआत पैरा एथलेटिक्स से नहीं, बल्कि व्हीलचेयर टेनिस से की थी।
वर्ष 2005 से 2012 तक लगभग सात वर्षों तक उन्होंने व्हीलचेयर टेनिस खेला। इस दौरान उन्होंने नियमित अभ्यास के जरिए अपनी शारीरिक क्षमता और खेल कौशल को बेहतर बनाया।
इसके बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में भविष्य बनाने का फैसला किया। वर्ष 2015 में उन्होंने भाला फेंक, चक्का फेंक और गोला फेंक जैसी स्पर्धाओं में हिस्सा लेना शुरू किया।
उसी वर्ष दिल्ली राज्य एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
यह उपलब्धि उनके खेल जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया।
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में घंटों बहाते थे पसीना
नीरज यादव के जीवन में नियमित अभ्यास और अनुशासन का विशेष महत्व था। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सुबह छह बजे से अभ्यास करने की उनकी दिनचर्या ने उनके खेल कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
व्हीलचेयर पर बैठकर भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उन्हें लगातार तकनीकी अभ्यास करना पड़ता था।
इन स्पर्धाओं में मजबूत ऊपरी शरीर, संतुलन और सही तकनीक की जरूरत होती है।
नीरज ने इन्हीं खूबियों को अपनी ताकत बनाया। अभ्यास के दौरान वह अपनी थ्रो तकनीक और प्रदर्शन में सुधार पर ध्यान देते थे।
उनकी मेहनत का परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया, जहां उन्होंने भारत के लिए कई महत्वपूर्ण पदक हासिल किए।
जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में जीता पहला स्वर्ण पदक
नीरज यादव को सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलताओं में से एक वर्ष 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में मिली।
उन्होंने पुरुषों की एफ-55 श्रेणी की भाला फेंक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
नीरज ने 29.84 मीटर का थ्रो करते हुए एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया।
इस जीत के बाद वह भारतीय पैरा एथलेटिक्स के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
जकार्ता में मिली सफलता ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को नई पहचान दी और आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
हांगझोऊ में दो स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास
वर्ष 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में नीरज यादव ने अपने प्रदर्शन से एक बार फिर सबका ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने चक्का फेंक और भाला फेंक दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।
चक्का फेंक में उन्होंने 38.56 मीटर का थ्रो किया, जबकि पुरुषों की एफ-55 भाला फेंक स्पर्धा में 33.69 मीटर का प्रदर्शन करते हुए गेम्स रिकॉर्ड बनाया।
इन दो स्वर्ण पदकों के साथ उनके एशियन पैरा गेम्स में जीते गए स्वर्ण पदकों की संख्या तीन हो गई।
हालांकि, बाद में डोपिंग नियमों के उल्लंघन के मामले में हांगझोऊ के दोनों स्वर्ण पदक उनसे वापस ले लिए गए।
डोपिंग मामले में निलंबन से करियर को लगा झटका
नीरज यादव के खेल जीवन में वर्ष 2023 के दौरान बड़ा विवाद सामने आया।
राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने उनके नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल पाए जाने के बाद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।
इस मामले में उन्होंने अपनी ओर से नमूने की जांच से जुड़े सवाल भी उठाए थे।
निलंबन के कारण वह अक्टूबर 2026 में जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके।
उनके कोच एस. सत्यनारायण ने बताया कि नीरज फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वापसी करना चाहते थे। हालांकि, प्रतिबंध के कारण उन्हें यह अवसर नहीं मिला।
दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पुलिस जांच जारी
27 अक्टूबर की रात नीरज यादव की दिल्ली के मौजपुर इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने घटनास्थल से कुछ वस्तुओं को कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। उनके परिचितों और परिवार के सदस्यों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
शुरुआती रिपोर्टों में जहरीला पदार्थ खाने की आशंका जताई गई है, लेकिन मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उनकी मौत को डोपिंग प्रतिबंध या निजी परिस्थितियों से सीधे जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। पुलिस की जांच के बाद ही परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
भारतीय पैरा खेल जगत में छोड़ी अमिट पहचान
नीरज यादव ने अपने खेल जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया। बचपन में पोलियो, व्हीलचेयर पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत उनके जीवन की महत्वपूर्ण चुनौतियां रहीं।
उनके खेल करियर की उपलब्धियां भारतीय पैरा एथलेटिक्स के इतिहास का हिस्सा हैं।
नीरज यादव की जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद खेलों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनकी असमय मौत से भारतीय पैरा खेल जगत ने एक अनुभवी खिलाड़ी खो दिया।