नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के एशिया कप खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी नहीं लेने का मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार की पाकिस्तान नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर भारतीय टीम पाकिस्तान से मैच खेल सकती है तो फिर पाकिस्तान के मंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल से जुड़े मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने को लेकर आपत्ति क्यों है। ओवैसी ने सरकार की नीति में कथित विरोधाभास बताते हुए स्पष्टता की मांग की है।
भारत ने महिला एशिया कप के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया, लेकिन मुकाबले के बाद हुए प्रेजेंटेशन समारोह में ट्रॉफी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय टीम ने कथित तौर पर मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की। इसके बाद ट्रॉफी सौंपे बिना ही प्रेजेंटेशन समारोह समाप्त होने की खबर सामने आई।
इस घटनाक्रम ने खेल और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी। अब ओवैसी ने सवाल किया है कि एक तरफ पाकिस्तान के खिलाफ क्रिकेट मैच खेला जा रहा है और दूसरी तरफ उसी देश से जुड़े अधिकारी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया जा रहा है तो सरकार की नीति आखिर क्या है?
ओवैसी ने क्या सवाल उठाया?
असदुद्दीन ओवैसी ने पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उनका सवाल मुख्य रूप से भारत की पाकिस्तान को लेकर अपनाई जा रही नीति पर केंद्रित रहा।
ओवैसी का तर्क है कि अगर सरकार और क्रिकेट से जुड़े भारतीय संस्थानों को पाकिस्तान के खिलाफ मैदान पर खेलने में कोई आपत्ति नहीं है तो फिर टूर्नामेंट से जुड़े पदाधिकारी से ट्रॉफी स्वीकार करने में समस्या क्यों होनी चाहिए।
उन्होंने इस मुद्दे को केवल क्रिकेट तक सीमित न रखते हुए विदेश नीति और पाकिस्तान को लेकर सरकार के रुख से जोड़ने की कोशिश की।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को लेकर अगर कोई स्पष्ट नीति है तो उसे देश के सामने रखा जाना चाहिए।
कौन हैं मोहसिन नकवी?
मोहसिन नकवी पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक और क्रिकेट प्रशासन से जुड़े चेहरों में शामिल हैं। वह पाकिस्तान सरकार में मंत्री रहने के साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी PCB से भी जुड़े रहे हैं और एशियन क्रिकेट काउंसिल यानी ACC के शीर्ष पद से भी उनका नाम जुड़ा है।
यही वजह है कि एशिया कप के प्रेजेंटेशन समारोह में उनकी मौजूदगी को लेकर भारत में राजनीतिक संवेदनशीलता बनी रही।
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव के कारण दोनों देशों के क्रिकेट संबंध भी सामान्य नहीं हैं। दोनों टीमें नियमित द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलतीं और आमतौर पर ICC तथा एशियाई टूर्नामेंटों में ही आमने-सामने होती हैं।
खिताब जीता लेकिन ट्रॉफी नहीं मिली
भारतीय महिला टीम के लिए टूर्नामेंट का अंत मैदान पर शानदार रहा। टीम ने फाइनल जीतकर एशिया कप का खिताब अपने नाम किया।
लेकिन इसके बाद प्रेजेंटेशन समारोह के दौरान ट्रॉफी को लेकर असामान्य स्थिति पैदा हो गई। भारतीय पक्ष की ओर से मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं किए जाने की खबर सामने आई।
आखिरकार समारोह भारतीय टीम को ट्रॉफी सौंपे बिना समाप्त हुआ। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आए।
मैदान पर खिताब जीतने के बावजूद टीम का ट्रॉफी के बिना रह जाना क्रिकेट प्रशंसकों के लिए भी हैरान करने वाला घटनाक्रम बना।
पुरुष टीम के साथ भी हो चुका है विवाद
यह पहला मौका नहीं बताया जा रहा जब मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने को लेकर भारतीय क्रिकेट टीम और एशियन क्रिकेट काउंसिल के बीच विवाद हुआ हो।
इससे पहले पुरुष एशिया कप के दौरान भी भारतीय टीम और नकवी से ट्रॉफी लेने के मुद्दे ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड और एशियाई क्रिकेट प्रशासन के संबंधों पर सवाल उठे थे।
अब महिला टीम के टूर्नामेंट में भी ऐसा ही विवाद सामने आने से मामला और बड़ा हो गया है।
इसी पृष्ठभूमि में ओवैसी ने सवाल उठाया है कि जब यह स्थिति पहले भी सामने आ चुकी है तो इसके समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।
पाकिस्तान से मैच खेलने पर सवाल
ओवैसी की आपत्ति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने और पाकिस्तानी अधिकारी से ट्रॉफी लेने के बीच कथित विरोधाभास है।
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट लगभग बंद है। लेकिन ICC और ACC जैसे बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में दोनों देशों की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं।
ऐसे मैचों में दर्शकों की दिलचस्पी बेहद ज्यादा रहती है और प्रसारण से भी बड़ी व्यावसायिक गतिविधियां जुड़ी होती हैं।
ओवैसी का सवाल इसी स्थिति पर है। उनका कहना है कि अगर राष्ट्रीय हित के आधार पर पाकिस्तानी पदाधिकारी से ट्रॉफी नहीं ली जा सकती तो पाकिस्तान की टीम के साथ मैच खेलने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है।
खेल और राजनीति का पुराना रिश्ता
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट में खेल और राजनीति लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। दोनों देशों के राजनीतिक संबंध खराब होने का असर क्रिकेट पर भी पड़ता रहा है।
कई वर्षों से भारत और पाकिस्तान के बीच नियमित द्विपक्षीय सीरीज नहीं हुई है। सुरक्षा और कूटनीतिक परिस्थितियों के कारण दोनों देशों के क्रिकेट संबंध मुख्य रूप से बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित हैं।
जब दोनों टीमें ICC विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी या एशिया कप जैसे टूर्नामेंट में आमने-सामने होती हैं तो मैच केवल खेल तक सीमित नहीं रहता। दोनों देशों के करोड़ों प्रशंसकों के कारण मुकाबले का राजनीतिक और भावनात्मक महत्व भी बढ़ जाता है।
सरकार पर विपक्ष का निशाना
ओवैसी ने इस मुद्दे के जरिए केंद्र सरकार की पाकिस्तान नीति पर सवाल उठाया है। विपक्षी दल पहले भी सरकार से यह पूछते रहे हैं कि पाकिस्तान के साथ खेल और अन्य क्षेत्रों में संपर्क को लेकर उसकी स्पष्ट नीति क्या है।
वहीं सरकार और भारतीय क्रिकेट प्रशासन का रुख सुरक्षा परिस्थितियों और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की बाध्यताओं के आधार पर अलग-अलग संदर्भों में सामने आता रहा है।
भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट और किसी अंतरराष्ट्रीय या एशियाई टूर्नामेंट में खेलने की परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं संबंधित अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के ढांचे के तहत आयोजित होती हैं।
फिर भी ट्रॉफी विवाद ने यह सवाल जरूर पैदा किया है कि ऐसे संवेदनशील आयोजनों में प्रेजेंटेशन की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं स्पष्ट की गई।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने भारतीय टीम के कथित फैसले का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने सवाल किया कि अगर टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर पाकिस्तान से मुकाबला कर रही है तो पुरस्कार समारोह को लेकर अलग रुख क्यों अपनाया गया।
राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद बहस और तेज हो गई।
इस मामले में खेल संस्थाओं की आधिकारिक स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम द्वारा ट्रॉफी न लेने के फैसले की परिस्थितियां और इसके पीछे किस स्तर पर निर्णय लिया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी से ही पूरी तस्वीर सामने आएगी।
खिलाड़ियों की उपलब्धि न हो पीछे
इस विवाद के बीच भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपलब्धि भी महत्वपूर्ण है। खिलाड़ियों ने मैदान पर प्रदर्शन करके खिताब जीता है और उनका खेल इस राजनीतिक विवाद से अलग देखा जाना चाहिए।
बड़े टूर्नामेंट में खिताब जीतना किसी भी टीम के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। इसलिए ट्रॉफी समारोह के विवाद के कारण खिलाड़ियों के प्रदर्शन की चर्चा पीछे नहीं छूटनी चाहिए।
मैदान से बाहर लिए गए प्रशासनिक या राजनीतिक फैसलों की जिम्मेदारी खिलाड़ियों पर डालना भी उचित नहीं होगा, जब तक यह स्पष्ट न हो कि फैसला किस स्तर पर लिया गया था।
अब क्या होगा?
अब नजर भारतीय क्रिकेट प्रशासन, एशियन क्रिकेट काउंसिल और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारतीय टीम को जीती हुई ट्रॉफी बाद में किस तरह सौंपी जाएगी और भविष्य में इस तरह के विवाद को रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाएगी।
ओवैसी के बयान ने इस घटना को खेल के मैदान से निकालकर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने सरकार से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने और पाकिस्तानी पदाधिकारी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करने के बीच अंतर स्पष्ट करने को कहा है।
फिलहाल भारतीय महिला टीम की खिताबी जीत अपनी जगह है और मोहसिन नकवी से ट्रॉफी न लेने का विवाद अपनी जगह। लेकिन ओवैसी के सवाल के बाद अब बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि **पाकिस्तान को लेकर खेल नीति में क्या स्पष्ट और एकसमान रुख होना चाहिए।
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