नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में एक बार फिर तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने सदन में केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग उठाई, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री की उपस्थिति का आग्रह किया, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह तय नहीं किया जा सकता कि किस दिन कौन-सा मंत्री सदन में उपस्थित रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम के चलते प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ और अंततः सदन की कार्यवाही दोपहर 2:15 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे की शुरुआत उस समय हुई जब विपक्षी सदस्यों ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग की। विपक्ष का कहना था कि जिन विषयों पर चर्चा होनी है, उनके जवाब के लिए गृह मंत्री का सदन में मौजूद रहना आवश्यक है। इस पर राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को विपक्ष की भावना से अवगत कराया और अनुरोध किया कि वे यह मांग सरकार तक पहुंचाएं।
रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार की ओर से किस दिन कौन-सा मंत्री सदन में उपस्थित रहेगा, इसका निर्णय विपक्ष नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि मंत्री अपनी जिम्मेदारियों और सरकारी कार्यों के अनुसार सदन में आते हैं और इस संबंध में निर्देश देना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय प्रश्नकाल चल रहा था और लगातार हो रहे व्यवधान के कारण सदन का महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहा है।
इस दौरान सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने हस्तक्षेप करते हुए स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे किसी मंत्री को निर्देश नहीं दे रहे थे, बल्कि केवल अपनी ओर से एक अनुरोध रख रहे थे। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि विपक्ष की इस भावना को सरकार तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि लोकतंत्र में विपक्ष की बात सुनना और उसे सरकार तक पहुंचाना संसदीय परंपरा का हिस्सा है।
हालांकि, सभापति की इस अपील के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार कम नहीं हुई। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्हें संसदीय नियमों का ज्ञान है और उन्हें किरेन रिजिजू से नियम सीखने की आवश्यकता नहीं है। इस पर रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी सदस्य का अपमान करना नहीं था। उन्होंने केवल राज्यसभा के नियमों का उल्लेख किया और कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार ही संचालित होनी चाहिए।
रिजिजू ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष एक वरिष्ठ सांसद हैं और सरकार उनका सम्मान करती है, लेकिन किसी भी मांग के समर्थन में संसदीय नियमों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन को सुचारु रूप से चलाना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की समान जिम्मेदारी है।
लगातार हो रहे शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल सामान्य रूप से नहीं चल सका। सभापति ने कई बार सभी सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। अंततः लगातार व्यवधान को देखते हुए उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजकर 15 मिनट तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।
संसद के मौजूदा सत्र में यह पहला अवसर नहीं है जब हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई हो। विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना बनी हुई है। विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार का कहना है कि सदन की कार्यवाही नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप ही संचालित होगी।
Tags: