नई दिल्ली: सरकारी सूत्रों ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) गाला डिनर के लिए विपक्ष-शासित राज्यों - केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु - के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था। ये निमंत्रण तब दिए गए जब भारत ने राष्ट्रीय राजधानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों के नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ आए।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री और NDA-शासित विभिन्न राज्यों के अन्य मुख्यमंत्री भी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ब्रिक्स नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए आयोजित गाला डिनर में शामिल हुए।इस डिनर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव, किरेन रिजिजू, प्रह्लाद जोशी, जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी शामिल हुए।
डिनर में शामिल होने वालों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस भी शामिल थे।यह गाला डिनर ब्रिक्स नेताओं द्वारा सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को अपनाए जाने के कुछ घंटों बाद आयोजित किया गया था। इस दस्तावेज़ में वैश्विक शासन में सुधार और विकासशील देशों के मजबूत प्रतिनिधित्व की मांग की गई थी।प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन के नतीजों को एक ऐसे ब्रिक्स का प्रतिबिंब बताया जो "व्यापक पहुंच और मजबूत उद्देश्य" वाला है।
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और अधिकतम संयम बरतने तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया जो स्थिति को और खराब कर सकती हैं।घोषणापत्र में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, तथा क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से अधिक प्रयास करने का आह्वान किया गया।
इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। BRICS समिट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की मुलाक़ात हुई, जिसमें नई दिल्ली ने शांतिदूत की भूमिका निभाई और साथ ही डिनर का आयोजन भी किया गया।डिनर में "नवरस – द यूनिवर्स ऑफ़ शेयर्ड इमोशन्स" (साझा भावनाओं का संसार) नाम का एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें BRICS देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत और विविधता का जश्न मनाया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में BRICS सिम्फनी – "वन रिदम, मेनी कल्चर्स" (एक लय, कई संस्कृतियाँ) भी शामिल थी, जिसमें BRICS सदस्य और सहयोगी देशों के संगीतकारों ने मिलकर संगीत की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में अलग-अलग संगीत परंपराओं को शामिल किया गया और BRICS देशों के वाद्ययंत्रों को भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं के साथ जोड़ा गया, जो BRICS परिवार के आपसी जुड़ाव का प्रतीक था।18वां BRICS समिट "मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण" थीम पर आयोजित किया गया, जिसमें विकास, सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन मुख्य फोकस के क्षेत्र रहे।
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