दिल्ली SIR में केजरीवाल परिवार समेत कई दिग्गजों को नोटिस, रेखा गुप्ता का सत्यापन पूरा
नई दिल्ली। दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के सत्यापन का दायरा बड़े राजनीतिक और सार्वजनिक चेहरों तक पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा उनके परिवार के सदस्यों के अलावा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा और नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज समेत कई लोगों को निर्वाचन अधिकारियों की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक नोटिस जारी होने का अर्थ संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया जाना नहीं है। SIR के दौरान जिन मतदाताओं की जानकारी पिछली मतदाता सूची से लिंक नहीं हो सकी या जिनके रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां पाई गईं, उन्हें दस्तावेज और स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी संबंधित प्रविष्टि पर निर्णय लेते हैं।
केजरीवाल के परिवार को क्यों मिला नोटिस?
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, माता-पिता गोविंद राम केजरीवाल और गीता देवी तथा बेटे पुलकित केजरीवाल को नोटिस जारी किया गया है। परिवार नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत है। अधिकारियों ने बताया कि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में ऐसी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी, जिससे उनकी प्रविष्टियों को पिछली SIR मतदाता सूची से लिंक किया जा सके। इसी वजह से उन्हें ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में रखा गया।
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक तथ्यों और दस्तावेजों का सत्यापन होने के बाद केजरीवाल और उनके परिवार की प्रविष्टियों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है।
रेखा गुप्ता के रिकॉर्ड में उम्र से जुड़ी विसंगति
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी SIR के तहत नोटिस जारी किया गया था। वह शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की मतदाता हैं। उनके एन्यूमरेशन फॉर्म के आधार पर माता-पिता और उनकी उम्र के अंतर से संबंधित ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ चिह्नित की गई थी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी हुआ और बूथ लेवल ऑफिसर ने फील्ड वेरिफिकेशन किया।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार रेखा गुप्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी मतदाता प्रविष्टि सत्यापित कर दी गई है। अब उनकी एंट्री को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मान्य कर दिया गया है।
कपिल सिब्बल और बांसुरी स्वराज भी सूची में
SIR सत्यापन के दायरे में कई अन्य प्रमुख नाम भी आए हैं। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज को ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में नोटिस दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि उपलब्ध विवरण के आधार पर उनकी वर्तमान प्रविष्टियों को पिछली SIR सूची से लिंक करने के लिए अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़ी है।
दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, उनकी पत्नी और भाई को भी नोटिस जारी किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनके मामले में नाम से संबंधित विसंगतियां चिह्नित की गई हैं। संबंधित मतदाताओं को दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है।
लाखों मतदाता सत्यापन के दायरे में
यह प्रक्रिया केवल राजनीतिक या सार्वजनिक हस्तियों तक सीमित नहीं है। दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल लाखों मतदाताओं की प्रविष्टियां सत्यापन के दायरे में आई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 13,79,785 मतदाता ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में हैं, जबकि 19,33,134 मतदाताओं की प्रविष्टियों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ चिह्नित की गई है।
‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ में मतदाता या माता-पिता के नाम की स्पेलिंग में अंतर, माता-पिता और मतदाता की उम्र के बीच असामान्य अंतर तथा परिवार से जुड़े कुछ अन्य रिकॉर्ड संबंधी अंतर शामिल हो सकते हैं। वहीं ‘नो मैपिंग’ का संबंध पिछली SIR मतदाता सूची से वर्तमान प्रविष्टि का मिलान नहीं हो पाने से है।
नोटिस मिलने का मतलब नाम हटना नहीं
निर्वाचन अधिकारियों ने साफ किया है कि किसी मतदाता को नोटिस जारी होना अपने आप में उसे अपात्र घोषित किए जाने या मतदाता सूची से नाम हटाने का फैसला नहीं है। नोटिस मिलने वाले व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद तथ्यों और रिकॉर्ड की जांच करके निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी निर्णय लेते हैं।
दिल्ली में दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 सितंबर तक निर्धारित है। नोटिसों के निस्तारण की समयसीमा 29 अक्टूबर है और इसके बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।
SIR के तहत केजरीवाल परिवार से लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य प्रमुख हस्तियों को नोटिस मिलने के बाद इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हुई है। हालांकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि नोटिस निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय संबंधित मतदाता द्वारा दिए गए दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की जांच के बाद किया जाएगा।