Delhi दिल्ली: डिप्टी डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ वॉटर एंड सैनेटेशन (WATSAN) नितेश कौशिक ने जल संकट और पानी प्रबंधन पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पानी कोई केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इसमें सबसे बड़ा मुद्दा लोगों के व्यवहार और जागरूकता का है।
कौशिक ने बताया, "लोग अक्सर सोचते हैं कि जल प्रबंधन सिर्फ टैक्टिकल यानी रणनीतिक पहल का मामला है, लेकिन यह सिर्फ एक छोटा हिस्सा है। असली चुनौती लोगों के व्यवहार और उनकी भागीदारी में है। अगर हम जनता की भागीदारी और सामुदायिक आंदोलन के जरिए लोगों को शामिल करते हैं, तभी हम स्थायी समाधान दे सकते हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण और प्रबंधन में तकनीकी समाधान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक समुदाय और नागरिक सक्रिय रूप से इसमें भाग नहीं लेते। कौशिक ने सामुदायिक सहभागिता, शिक्षा और जागरूकता अभियान को स्थायी जल समाधान का मूल आधार बताया।
डिप्टी डायरेक्टर ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक नागरिक को जल के महत्व और संरक्षण की जिम्मेदारी समझनी होगी। स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे व्यवहार परिवर्तन जैसे पानी का विवेकपूर्ण उपयोग, रिसायक्लिंग, और रिसोर्सेज़ की निगरानी, लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।
कौशिक ने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संस्थाओं को मिलकर जनभागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए। सामुदायिक आंदोलन, वर्कशॉप, और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पानी के महत्व और संरक्षण के उपायों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।
इस प्रकार, उनका मानना है कि पानी का स्थायी प्रबंधन केवल तकनीकी उपायों पर निर्भर नहीं है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन के बिना कोई भी समाधान प्रभावी नहीं हो सकता।