नई दिल्ली। कई बार जिंदगी में ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां एक परिवार ने जिस शख्स को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वही व्यक्ति 15 दिन बाद अचानक जिंदा मिल गया। एक फोन कॉल ने परिवार की पूरी दुनिया बदल दी और जिस घर में मातम पसरा था, वहां अचानक खुशियां लौट आईं।
परिवार ने जिस व्यक्ति को खोया हुआ मान लिया था, उसकी आवाज जब अचानक फोन पर सुनाई दी तो सभी के होश उड़ गए। शुरुआत में किसी को विश्वास नहीं हुआ कि यह सच हो सकता है। लेकिन जब बातचीत आगे बढ़ी और सच्चाई सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया।
हादसे के बाद हुई थी बड़ी गलती
मामला एक ऐसी घटना से जुड़ा है, जहां एक दुर्घटना के बाद एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। पुलिस ने शव को अस्पताल पहुंचाया और पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान परिवार को सूचना दी गई कि एक व्यक्ति हादसे का शिकार हुआ है।
परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे और वहां मौजूद परिस्थितियों के बीच शव की पहचान कर ली। पहचान के दौरान कुछ ऐसी चीजें सामने आईं, जिनके आधार पर परिवार को लगा कि वह उनका ही सदस्य है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिवार के लिए यह पल बेहद दर्दनाक था। उन्हें लगा कि उन्होंने हमेशा के लिए अपने प्रियजन को खो दिया है।
15 दिन तक चलता रहा शोक
अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों के साथ मिलकर शोक मनाया। घर में दुख का माहौल था। जिस व्यक्ति के साथ उन्होंने जिंदगी के कई साल बिताए थे, उसके जाने का दर्द सभी को परेशान कर रहा था।
परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि कुछ दिनों बाद ऐसा मोड़ आएगा, जो उनकी सोच और भावनाओं दोनों को बदल देगा।
अचानक फोन की घंटी ने बदल दी कहानी
करीब 15 दिन बाद परिवार के पास एक फोन कॉल आया। फोन उठाते ही सामने से जिस व्यक्ति की आवाज आई, उसे सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह आवाज उसी शख्स की थी, जिसके अंतिम संस्कार की रस्में वे पूरी कर चुके थे। पहले तो परिवार को लगा कि यह कोई गलतफहमी या मजाक है, लेकिन बातचीत के दौरान धीरे-धीरे पूरा सच सामने आने लगा।
शख्स ने बताया कि वह जिंदा है और एक अलग जगह पर था। इसके बाद परिवार ने तुरंत उसकी पहचान और लोकेशन की पुष्टि की।
सामने आया गलत पहचान का मामला
जांच में पता चला कि हादसे में मारे गए व्यक्ति की पहचान गलत हो गई थी। परिवार ने जिस शव को अपना समझकर अंतिम संस्कार किया था, वह किसी और व्यक्ति का था।
वहीं, उनका अपना सदस्य किसी कारण से परिवार से संपर्क नहीं कर पाया था। यही वजह रही कि लंबे समय तक परिवार को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
परिवार की खुशी का नहीं रहा ठिकाना
जब परिवार के सामने सच्चाई आई तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। कुछ समय पहले जिस व्यक्ति की मौत का दुख मनाया जा रहा था, वही अब उनके सामने वापस आने वाला था।
परिवार के सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनके लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने भी जांच शुरू की। अधिकारियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर पहचान में इतनी बड़ी गलती कैसे हुई।
ऐसे मामलों में शव की पहचान के लिए कई प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है, लेकिन कभी-कभी परिस्थितियों, जल्दबाजी या मानवीय भूल के कारण गलत पहचान की घटनाएं सामने आ जाती हैं।
पुलिस अब इस बात की जांच करती है कि इस पूरी प्रक्रिया में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
देश और दुनिया में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां किसी व्यक्ति को मृत समझ लिया गया और बाद में वह जिंदा मिला। कई बार दुर्घटना, लापता होने या पहचान में गलती के कारण ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं।
इन घटनाओं से यह सीख मिलती है कि किसी भी गंभीर मामले में पूरी तरह पुष्टि किए बिना अंतिम निर्णय नहीं लेना चाहिए।
जिंदगी ने दिया दूसरा मौका
इस घटना ने परिवार को दुख और खुशी दोनों का अनुभव कराया। कुछ दिनों तक उन्होंने जिस व्यक्ति के खोने का दर्द सहा, वही व्यक्ति दोबारा उनकी जिंदगी में लौट आया।
यह कहानी बताती है कि कई बार हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, उम्मीद हमेशा बनी रहनी चाहिए। एक फोन कॉल ने एक परिवार से उनका दुख छीनकर उन्हें दोबारा खुशी दे दी।