New Delhi : केंद्र सरकार ने चार लेबर कोड पूरी तरह लागू किए

Update: 2026-05-09 07:13 GMT

Delhi दिल्ली: केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार के बाद देश के श्रम क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए चारों लेबर कोड को पूरी तरह लागू कर दिया है। इसके साथ ही मजदूरों के लिए मिनिमम वेज और यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी को सुनिश्चित करने वाले नियमों को भी आधिकारिक रूप से प्रकाशित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद देश में श्रम कानूनों की व्यवस्था में व्यापक बदलाव माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, ये चार लेबर कोड—कोड ऑन वेजेज, 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड, 2020, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020—21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गए हैं। इन कोड्स को लागू करने का उद्देश्य देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को एक आधुनिक, सरल और एकीकृत ढांचे में बदलना है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन चारों कोड के तहत बनाए गए सभी नियम अब आधिकारिक गजट में नोटिफाई कर दिए गए हैं। इसके साथ ही इन्हें पूरे देश में लागू करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई है। यह कदम श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने और रोजगार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन नए नियमों के लागू होने से देश के संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। खासकर मिनिमम वेज, समय पर वेतन भुगतान, स्वास्थ्य सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियों में सुधार जैसे मुद्दों पर नई व्यवस्था से अधिक स्पष्टता आएगी।

इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड के तहत उद्योगों में श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संबंधों को अधिक संतुलित बनाने की कोशिश की गई है, जबकि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी के जरिए कर्मचारियों को पेंशन, बीमा और अन्य लाभों को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को मजबूत करेगा, जबकि वेजेज कोड न्यूनतम वेतन और वेतन भुगतान व्यवस्था को सरल बनाएगा।

सरकार का मानना है कि इन चार लेबर कोड के लागू होने से श्रम कानूनों में एकरूपता आएगी और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा। साथ ही, श्रमिकों को उनके अधिकारों का अधिक स्पष्ट और प्रभावी लाभ मिल सकेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय श्रम व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिसका असर आने वाले वर्षों में रोजगार और औद्योगिक क्षेत्र पर दिखाई देगा।

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