नई दिल्ली: JCB India Ltd. से जुड़े एक बहुचर्चित कारोबारी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर सोमवार को नई दिल्ली के Le Méridien Hotel में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिकायतकर्ता पक्ष ने कई गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि लगभग ₹50 करोड़ के निवेश के बावजूद उन्हें आर्थिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न और कथित आपराधिक धमकियों का सामना करना पड़ा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिकायतकर्ता गौरव मोदी, निदेशक कृष्णा ऑटो राइडर्स प्राइवेट लिमिटेड (Krishna JCB) की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह मामला केवल एक कारोबारी विवाद नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज आपराधिक प्रकरण है। उन्होंने न्यायालय के आदेश, एफआईआर और अन्य दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2017-18 में JCB India Ltd. के साथ डीलरशिप संबंध स्थापित होने के बाद उन्हें व्यवसाय के विस्तार के नाम पर लगातार बड़े पैमाने पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। आरोप है कि भूमि खरीद, अत्याधुनिक शोरूम, सर्विस सेंटर, भवन निर्माण, मशीनरी, उपकरण, फर्नीचर, स्पेयर पार्ट्स, स्टाफ भर्ती और प्रशिक्षण सहित विभिन्न मदों में करीब ₹50 करोड़ का निवेश किया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि निवेश के बाद कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अतिरिक्त धनराशि की कथित मांग की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि कथित मांगें पूरी नहीं करने पर डीलरशिप के नवीनीकरण और विस्तार को लेकर दबाव बनाया गया तथा मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक शोषण और आपराधिक धमकियां दी गईं। शिकायतकर्ता के अनुसार, डीलरशिप समाप्त करने की चेतावनी देकर उन पर लगातार दबाव बनाया गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

शिकायतकर्ता पक्ष ने बताया कि पहले पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कटघोरा ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों पर विचार करते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 22 मई 2026 को कटघोरा थाना, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) में एफआईआर संख्या 0175/2026 दर्ज की गई। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 एवं 3(5) के तहत दर्ज हुई है।

एफआईआर में संदीप कलरा और जसमीत सिंह को आरोपी बनाया गया है। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि न्यायालय में दायर मूल शिकायत में दीपक सेठी, संदीप कलरा, जसमीत सिंह और अनंत सिंह सहित अन्य अधिकारियों के विरुद्ध भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि वह मामले में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कानूनी लड़ाई जारी रखेगा और जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करता है। अधिवक्ता ने कहा कि आगे की कानूनी रणनीति भी न्यायालय की प्रक्रिया के अनुरूप तय की जाएगी।

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