21 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा: अमित शाह राज्यसभा में
New Delhi: गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को रेखांकित किया और कहा कि 21 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का सफाया कर दिया जाएगा।
राज्यसभा में अपने मंत्रालय के कामकाज पर बहस का जवाब देते हुए अमित शाह ने जम्मू - कश्मीर में आतंकवाद , नक्सल चुनौती, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और पूर्वोत्तर की समस्याओं से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा की । उन्होंने कहा कि भाजपा नीत सरकार के कार्यकाल में देश नक्सल समस्या से मुक्त हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस सदन में जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि इस देश से नक्सलवाद 21 मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएगा।’’ अमित शाह ने नक्सलियों से निपटने में सुरक्षा बलों को सटीक खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा की और कहा कि उन्हें उन लोगों पर दया आती है जो सोचते हैं कि नक्सलवाद केवल एक राजनीतिक समस्या है।
उन्होंने कहा, "जब 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार सत्ता में आई, तो हमें 2014 से पहले की कई विरासतें मिलीं। इस देश की सुरक्षा और विकास को तीन मुख्य मुद्दों के कारण हमेशा चुनौती मिलती रही। इन तीन मुद्दों ने देश की शांति में बाधा डाली, देश की सुरक्षा पर सवाल उठाए और लगभग चार दशकों तक देश के विकास को बाधित किया; इन्होंने देश की पूरी व्यवस्था को कई बार हास्यास्पद भी बनाया।" उन्होंने कहा, "ये तीन मुद्दे थे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद , वामपंथी उग्रवाद जो तिरुपति से पशुपतिनाथ तक का सपना देखता था और पूर्वोत्तर में उग्रवाद। अगर आप इन तीनों मुद्दों को एक साथ जोड़ दें, तो चार दशकों में इस देश के करीब 92,000 नागरिक मारे गए। इन तीनों मुद्दों को खत्म करने के लिए कभी भी कोई सुनियोजित प्रयास नहीं किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद ये प्रयास किए।"
अमित शाह ने कहा कि उनके मंत्रालय के कामकाज के दौरान 21 सदस्यों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा, "एक तरह से गृह मंत्रालय के अनेक कार्यों के आयामों को समेटने का प्रयास किया गया। सबसे पहले मैं हजारों राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ सीमाओं को मजबूत करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।" अमित शाह ने कहा कि कई अपराध की घटनाएं बहु-राज्यीय आयाम वाली होती हैं, जैसे मादक पदार्थ और साइबर अपराध।
उन्होंने कहा, "एक तरह से गृह मंत्रालय बहुत कठिन परिस्थितियों में काम करता है। संविधान ने कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों को दी है। सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह सही फैसला है। इसमें कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। लेकिन जब कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य संभालते हैं, तो 76 साल के बाद अब ऐसी स्थिति है कि कई तरह के अपराध राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रह जाते, वे अंतरराज्यीय भी होते हैं और बहुराज्यीय भी - जैसे नारकोटिक्स, साइबर क्राइम, संगठित अपराध गिरोह, हवाला।"
उन्होंने कहा, "ये सभी अपराध सिर्फ़ एक राज्य के भीतर ही नहीं होते। देश में कई अपराध देश के बाहर भी होते हैं। इसलिए, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय में बदलाव करना ज़रूरी हो गया है। मैं गर्व के साथ कहता हूं कि 10 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय में लंबे समय से लंबित बदलाव किए।" अमित शाह ने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति में आए बदलाव के बारे में बात की ।
उन्होंने कहा, " अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारतीय युवाओं का आतंकवादियों से जुड़ाव लगभग खत्म हो गया है। दस साल पहले आतंकवादियों का महिमामंडन आम बात थी और उनके जनाजे निकाले जाते थे। लेकिन अब जब आतंकवादी मारे जाते हैं तो उन्हें वहीं दफना दिया जाता है। आतंकवादियों के रिश्तेदार जो कभी सरकारी सुविधाओं का आनंद लेते थे, उन्हें सख्त संदेश देने के लिए बेरहमी से सरकारी पदों से हटा दिया गया है।" उन्होंने कहा, "मैं अपने संविधान निर्माताओं को अनुच्छेद 370 को अस्थायी बनाने और उसी अनुच्छेद के भीतर इसे हटाने का समाधान प्रदान करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। हालांकि, वोट बैंक की राजनीति ने इसे सुरक्षित रखा। लेकिन 5 अगस्त, 2019 को पीएम मोदी ने इसे हटाने का ऐतिहासिक कदम उठाया, जिससे कश्मीर के शेष भारत के साथ एकीकरण के एक नए युग की शुरुआत हुई।" (एएनआई)