एथेनॉल ब्लेंडिंग पर बड़ा फैसला संभव पेट्रोल पंपों पर लेबलिंग की उठी मांग
नई दिल्ली। पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की मात्रा को लेकर देशभर में चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को यह जानकारी दी जाए कि उनके वाहन में डाला जा रहा पेट्रोल कितना एथेनॉल मिश्रित है, इस मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम Court 31 अगस्त को सुनवाई करेगा। याचिका में पेट्रोल पंपों के डिस्पेंसिंग नोजल और ईंधन बिल पर एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल प्रतिशत को ग्राहकों के लिए आसानी से समझने योग्य तरीके से प्रदर्शित किया जाए। इसके साथ ही हर पेट्रोल बिल या रसीद पर भी एथेनॉल मिश्रण की जानकारी देना अनिवार्य किया जाए, ताकि वाहन मालिक अपने वाहन की क्षमता और ईंधन की उपयुक्तता के अनुसार फैसला ले सकें।
एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर क्यों उठे सवाल
भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देना है। वर्तमान में E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिश्रित ईंधन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है।
हालांकि, कई वाहन मालिकों ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर चिंता जताई है। कुछ लोगों का कहना है कि ज्यादा एथेनॉल मिश्रण से पुराने वाहनों के इंजन, माइलेज और रखरखाव पर असर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए याचिका में उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
याचिका में क्या-क्या मांगें रखी गईं
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं। इसमें कहा गया है कि:
* हर पेट्रोल पंप के नोजल पर एथेनॉल मिश्रण प्रतिशत की जानकारी लिखी जाए।
* पेट्रोल की रसीद पर भी एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट हो।
* वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन और निर्माण वर्ष के अनुसार एथेनॉल ईंधन अनुकूलता की जानकारी देने वाला आधिकारिक डेटाबेस बनाया जाए।
* E20 पेट्रोल के असर पर विशेषज्ञ समिति रिपोर्ट तैयार करे।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि विशेषज्ञ समिति ईंधन की क्षमता, इंजन की उम्र, रखरखाव खर्च, वाहन वारंटी और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दों का अध्ययन करे।
पुराने वाहनों को लेकर चिंता
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ी चिंता पुराने वाहनों को लेकर है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उनकी गाड़ी किस स्तर तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए सुरक्षित है।
याचिका में वाहन मालिकों के लिए एक ऐसा सार्वजनिक डेटाबेस बनाने की मांग की गई है, जहां कंपनी, मॉडल और इंजन के आधार पर यह पता चल सके कि कौन सा वाहन किस तरह के एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए उपयुक्त है।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार के अनुसार इससे पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम करने में मदद मिलती है और कृषि क्षेत्र को भी फायदा पहुंचता है। सरकार लगातार E20 ईंधन को बढ़ावा दे रही है।
वहीं, उपभोक्ताओं का कहना है कि ईंधन में बदलाव से पहले उन्हें पूरी जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका तर्क है कि ग्राहक को पता होना चाहिए कि वह कौन सा ईंधन खरीद रहा है और वह उसके वाहन के लिए कितना उपयुक्त है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
अब सभी की नजर 31 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत इस मामले में यह देखेगी कि पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की मात्रा बताने के लिए कोई अनिवार्य व्यवस्था बनाई जा सकती है या नहीं।
अगर कोर्ट याचिका पर कोई निर्देश देता है तो इसका सीधा असर देशभर के पेट्रोल पंपों और वाहन मालिकों पर पड़ सकता है। इससे ग्राहकों को ईंधन खरीदते समय अधिक पारदर्शिता मिलने की संभावना है।