नई दिल्ली : मई 2025 में भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए **'ऑपरेशन सिंदूर'** को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि चार दिनों तक चले सैन्य अभियान के दौरान पाकिस्तान ने भारत से युद्धविराम की अपील उस समय की थी, जब भारतीय सशस्त्र बल अपने तय सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं कर पाए थे। भारत ने तत्काल युद्धविराम स्वीकार नहीं किया, बल्कि अपनी रणनीतिक योजना के अनुसार कार्रवाई जारी रखते हुए पाकिस्तान को कुछ घंटों तक इंतजार कराया, ताकि निर्धारित सैन्य लक्ष्यों पर हमले पूरे किए जा सकें।
एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान जनरल अनिल चौहान ने कहा कि 10 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान ने डायरेक्टर्स जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) की हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क कर बातचीत की पहल की। उनके अनुसार यह बेहद चौंकाने वाली स्थिति थी, क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले यानी 9 मई को पाकिस्तान की ओर से लगातार आक्रामक बयान दिए जा रहे थे और दावा किया जा रहा था कि वह 48 घंटे के भीतर भारत को सबक सिखा देगा। लेकिन कुछ ही घंटों बाद हालात पूरी तरह बदल गए और पाकिस्तान को स्वयं भारत से संपर्क कर युद्ध रोकने की अपील करनी पड़ी।
पूर्व सीडीएस ने बताया कि उस समय भारतीय सेना अपनी पूर्व निर्धारित सैन्य रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही थी। पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम का प्रस्ताव आने के बावजूद भारत ने पहले अपने महत्वपूर्ण सैन्य उद्देश्यों को पूरा करना जरूरी समझा। इसी कारण पाकिस्तान को तत्काल जवाब नहीं दिया गया और भारतीय वायुसेना ने तय लक्ष्यों पर हमलों की अगली श्रृंखला पूरी की। इसके बाद ही दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी।
जनरल चौहान ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल जवाबी कार्रवाई करना नहीं था, बल्कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश देना था कि उसकी सीमा के भीतर स्थित कोई भी सैन्य ठिकाना भारतीय सेना की पहुंच से बाहर नहीं है। भारतीय सेना ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आतंकवाद को समर्थन देने वाले ढांचे और सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी। इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को नष्ट करना था।
जनरल चौहान के अनुसार 9 मई की रात और 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने बेहद सटीक और प्रभावी हमले किए, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा। इन हमलों के बाद पाकिस्तान को यह अंदेशा हो गया कि यदि संघर्ष आगे बढ़ा तो भारत और भी व्यापक सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसी आशंका के चलते उसने तत्काल युद्धविराम की पहल की और डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए भारत से संपर्क किया। बाद में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत हुई और युद्धविराम पर सहमति बनी।
पूर्व सीडीएस ने इस पूरे अभियान में भारतीय सेना की तकनीकी और रणनीतिक बढ़त को भी सफलता का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान भारतीय कमांडरों के पास दुश्मन की गतिविधियों और अपने अभियानों की वास्तविक समय (रियल-टाइम) की जानकारी उपलब्ध थी। इससे सेना को हर मोर्चे पर तेजी से निर्णय लेने में मदद मिली। भारतीय सैन्य नेतृत्व लगातार यह देख पा रहा था कि किस लक्ष्य पर कितना प्रभाव पड़ा है और दुश्मन की प्रतिक्रिया क्या है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियारों की ताकत ही नहीं, बल्कि सूचना, तकनीक और त्वरित निर्णय क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभाती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने इन तीनों क्षेत्रों में अपनी श्रेष्ठता साबित की। यही कारण रहा कि पाकिस्तान जल्द ही दबाव में आ गया और उसे युद्धविराम की अपील करनी पड़ी। जनरल चौहान के इस खुलासे ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और भारतीय सैन्य नेतृत्व की तैयारी को लेकर एक नई तस्वीर सामने रखी है।