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संसद में गतिरोध खत्म करने की कोशिश, किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से की संपर्क की पहल

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद लोकसभा और राज्यसभा में जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हंगामे और विपक्ष के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क किया और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए समाधान निकालने की कोशिश की।
सूत्रों के अनुसार, सरकार और विपक्ष के बीच बने गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। सरकार चाहती है कि संसद में लंबित विधायी कार्य पूरे किए जा सकें और चर्चा के लिए माहौल बनाया जा सके। वहीं, विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और सदन में चर्चा से पहले अपने मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है।
मानसून सत्र की शुरुआत से ही संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्षी दलों ने कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, जिसके कारण कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है।
विपक्ष की ओर से लगातार उठाए जा रहे मुद्दों के कारण सदन में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है। विपक्षी सांसद नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगें रख रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि संसद चर्चा और बहस के लिए है और विपक्ष को सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की राहुल गांधी से संपर्क की पहल को सरकार और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि बातचीत के माध्यम से ही मौजूदा गतिरोध का रास्ता निकाला जा सकता है।
संसद में लगातार हो रहे व्यवधान को लेकर सरकार पहले भी विपक्ष से सहयोग की अपील कर चुकी है। प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की ओर से भी कई बार कहा गया है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन का सुचारू रूप से चलना जरूरी है।
वहीं, विपक्ष का कहना है कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से पीछे नहीं हट रहा है, लेकिन सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए। विपक्षी दलों का आरोप है कि कई गंभीर विषयों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।
राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और विपक्षी दलों के बीच समन्वय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में सरकार की ओर से उनसे बातचीत की पहल को गतिरोध खत्म करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री का यह कदम ऐसे समय में आया है जब संसद का महत्वपूर्ण समय हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। सरकार और विपक्ष दोनों के लिए जरूरी है कि विधायी कामकाज आगे बढ़े और जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। यदि सरकार और विपक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं तो आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही बेहतर तरीके से चल सकती है।
फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच हुई बातचीत का क्या परिणाम निकलता है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो मानसून सत्र में लंबित विधेयकों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का रास्ता साफ हो सकता है।
संसद लोकतांत्रिक बहस का प्रमुख मंच है और यहां सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मौजूदा गतिरोध को खत्म करने के लिए शुरू हुई बातचीत को सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।





