शिक्षकों को बड़ी राहत TET की समयसीमा एक साल बढ़ी

Update: 2026-08-10 15:16 GMT
नई दिल्ली :  केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई अधिनियम, 2009 के दायरे में आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य न्यूनतम योग्यता है। सरकार ने यह जानकारी ऐसे समय में दी है, जब देशभर में बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता और इसे हासिल करने के लिए निर्धारित समय सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार संबंधित पात्र शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी योग्यता हासिल करनी होगी।
शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को दिए अपने फैसले में टीईटी को बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में शामिल माना था। अदालत ने अपने फैसले में पात्र शिक्षकों को तय समय सीमा के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद इस फैसले की समीक्षा के लिए विभिन्न याचिकाएं दायर की गई थीं।
सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को इन समीक्षा याचिकाओं का निपटारा करते हुए टीईटी योग्यता हासिल करने की समय सीमा में बदलाव किया। पहले पात्र शिक्षकों को 31 अगस्त 2027 तक टीईटी पास करना था, लेकिन अदालत ने अब यह समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है। इसका मतलब है कि संबंधित पात्र शिक्षकों को अब टीईटी परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष का समय मिल गया है। यह राहत उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि संबंधित राज्य सरकारें और सक्षम प्राधिकरण टीईटी परीक्षा का नियमित आयोजन करने का प्रयास करें। अदालत ने परीक्षा को अधिमानतः साल में दो बार आयोजित करने की बात कही है। इसका उद्देश्य पात्र शिक्षकों को टीईटी की न्यूनतम योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है। यदि परीक्षा नियमित अंतराल पर आयोजित होती है तो शिक्षकों को केवल एक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे समय रहते अपनी योग्यता पूरी कर सकेंगे।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सेवारत शिक्षकों को विशेष राहत भी दी है। अदालत ने उन शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखा है, जिनकी नियुक्ति आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा था। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत ने ऐसे शिक्षकों को टीईटी योग्यता हासिल किए बिना अपनी सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी है। यानी इस विशेष श्रेणी के शिक्षकों को केवल टीईटी परीक्षा पास नहीं करने के आधार पर तत्काल सेवा से बाहर नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इस राहत के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षक यदि टीईटी योग्यता हासिल नहीं करते हैं तो वे पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। यानी उन्हें सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति तो होगी, लेकिन पदोन्नति का लाभ लेने के लिए टीईटी योग्यता जरूरी रहेगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने सेवा जारी रखने के मामले में सीमित राहत दी है, लेकिन शिक्षक पात्रता और पदोन्नति के संबंध में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखा है।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। ऐसे में शिक्षकों की भर्ती, उनकी सेवा शर्तें, नियुक्ति, तैनाती और अन्य प्रशासनिक मामलों से संबंधित अधिकार संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के क्षेत्र में आते हैं। इसलिए टीईटी परीक्षा के आयोजन और उससे जुड़े प्रशासनिक प्रबंधों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
सरकार के जवाब से यह साफ है कि आरटीई अधिनियम के दायरे में आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य न्यूनतम योग्यता के तौर पर देखा जा रहा है। पात्र शिक्षकों को अब 31 अगस्त 2028 तक अपनी टीईटी योग्यता पूरी करनी होगी। वहीं, परीक्षा को नियमित रूप से आयोजित करने की सुप्रीम कोर्ट की सलाह से शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है। इस पूरे फैसले का असर उन लाखों शिक्षकों पर पड़ सकता है, जो आरटीई अधिनियम के तहत आने वाले स्कूलों में कार्यरत हैं और जिन्हें भविष्य में अपनी सेवा से जुड़े नियमों के तहत टीईटी योग्यता हासिल करनी है।
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