नई दिल्ली। जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जाति जनगणना के मौजूदा फॉर्मेट में गंभीर खामियां हैं। पार्टी का कहना है कि जातियों की सही जानकारी जुटाने के लिए सवालों का तरीका स्पष्ट और वैज्ञानिक होना चाहिए, ताकि प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सामाजिक न्याय की नीतियां बनाई जा सकें।

कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के प्रमुख और महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जाति जनगणना के फॉर्मेट में ड्रॉप-डाउन लिस्ट के बजाय ओपन-एंडेड सवालों का इस्तेमाल करने का सरकार का फैसला एक बड़ी कमी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से डेटा की सटीकता प्रभावित हो सकती है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदी में एक पोस्ट कर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना केवल जातियों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने लिखा कि सही सवालों के जरिए सही डेटा प्राप्त होगा और इसी आधार पर सही हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सकती है।



कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले चार दिनों में देशभर में 17 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुकी है और लगातार मांग कर रही है कि जाति जनगणना को सही तरीके से कराया जाए। उन्होंने कहा कि जाति आधारित आंकड़ों की उपलब्धता से सरकार को नीतियां बनाने और समाज के अलग-अलग वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना की प्रक्रिया को कमजोर करना चाहती है। जयराम रमेश ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी प्रक्रिया को असफल बनाना चाहते हैं। हालांकि सरकार की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कांग्रेस लंबे समय से देश में जाति जनगणना कराने की मांग करती रही है। पार्टी का तर्क है कि देश में सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समझने के लिए जाति आधारित आंकड़े जरूरी हैं। इन आंकड़ों के आधार पर आरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।

वहीं, जाति जनगणना के सवालों और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि लोगों से खुले सवाल पूछे जाएंगे तो जवाबों में एकरूपता नहीं रहेगी और आंकड़ों का सही विश्लेषण करना कठिन हो सकता है।

पार्टी की मांग है कि जाति की पहचान और वर्गीकरण के लिए स्पष्ट विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, जिससे लोगों की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो सके। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जनगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में सामाजिक न्याय को जाति जनगणना से जोड़ते हुए कहा कि जब तक समाज की वास्तविक स्थिति का पता नहीं होगा, तब तक जरूरतमंद वर्गों के लिए प्रभावी नीतियां बनाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि सही आंकड़े ही समान अवसर और उचित भागीदारी सुनिश्चित करने का आधार बन सकते हैं।

कांग्रेस के इस बयान के बाद जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व से जोड़ रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को लेकर अपने स्तर पर तैयारी की जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जाति जनगणना आने वाले समय में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है। अलग-अलग दल इसे अपने-अपने नजरिए से उठा रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक न्याय और अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं सरकार की ओर से प्रक्रिया को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।

फिलहाल कांग्रेस ने जाति जनगणना के फॉर्मेट को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है और सरकार से मांग की है कि प्रक्रिया में जरूरी सुधार किए जाएं। पार्टी का कहना है कि केवल संख्या जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आंकड़ों का सही होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर भविष्य की सामाजिक नीतियां तय होंगी।

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