नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में प्रशासनिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब दिल्ली नगर निगम (MCD) के जोन और दिल्ली सरकार के राजस्व जिलों के नाम एक समान कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली परेशानियां खत्म होंगी।
दिल्ली में पहले राजस्व जिलों और MCD के क्षेत्रीय कार्यालयों के नाम अलग-अलग होने के कारण कई बार भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती थी। एक ही राजस्व जिले के अंतर्गत MCD के दो या तीन अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालय आने से प्रशासनिक आदेशों को लागू करने, योजनाओं की समीक्षा करने और विकास कार्यों की निगरानी में दिक्कतें आती थीं। अब इस समस्या को दूर करने के लिए दोनों व्यवस्थाओं के नामों में समानता लाई गई है।
केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले के बाद MCD के 12 क्षेत्रीय कार्यालय अब दिल्ली सरकार के राजस्व जिलों के नाम से पहचाने जाएंगे। दिल्ली में कुल 13 राजस्व जिले हैं, जिनमें से 12 जिले MCD के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि नई दिल्ली जिला क्षेत्र नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के अंतर्गत आता है।
दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने 25 दिसंबर 2025 की अधिसूचना के जरिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 39 उप-मंडल, तहसील और 13 क्षेत्रों का गठन किया था। इन क्षेत्रों को MCD के 12 जोन, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली छावनी क्षेत्र के अनुरूप बनाया गया था। अब MCD के पुराने जोन नामों को नए राजस्व जिला नामकरण के अनुसार बदल दिया गया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहल पर यह बदलाव किया गया है। सरकार का मानना है कि एक समान नाम होने से सरकारी विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा और जनता को भी अपने क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए सही कार्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी।
दिल्ली नगर निगम के महापौर प्रवेश वाही ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक दृष्टि से एक उचित कदम है। इससे विकास परियोजनाओं को लागू करने में होने वाली देरी कम होगी और सरकारी योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
MCD के तहत दिल्ली में कुल 250 वार्ड हैं। इन वार्डों को क्षेत्रीय आधार पर अलग-अलग जोन के अंतर्गत रखा गया है। इन क्षेत्रों में MCD उपायुक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं।
नई व्यवस्था के तहत MCD के पुराने जोन के नामों में बदलाव किया गया है। नरेला जोन को अब बाहरी उत्तर, सिविल लाइंस को उत्तर, रोहिणी को उत्तर-पश्चिम, केशवपुरम को मध्य उत्तर, सिटी एसपी को पुरानी दिल्ली, करोल बाग को मध्य, नजफगढ़ को दक्षिण पश्चिम, शाहदरा साउथ को पूर्वी, शाहदरा नार्थ को उत्तर-पूर्व, दक्षिण जोन को दक्षिण और पश्चिम जोन को पश्चिम नाम से जाना जाएगा।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इस बदलाव को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। MCD की निर्माण समिति के पूर्व चेयरमैन जगदीश ममगांई ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर यह फैसला अच्छा है, लेकिन आम जनता को शुरुआत में भ्रम हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि MCD क्षेत्रीय कार्यालयों के नाम के साथ MCD शब्द भी जोड़ा जाना चाहिए, ताकि लोगों को यह स्पष्ट रहे कि वे किस विभाग के कार्यालय में जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य सिर्फ नाम बदलना नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है। समान नाम होने से विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा, योजनाओं की निगरानी आसान होगी और नागरिक सेवाओं में सुधार आएगा। आने वाले समय में इस नई व्यवस्था का असर दिल्ली के विकास कार्यों और जनसुविधाओं पर देखने को मिलेगा।