अनिल अंबानी को ED का बड़ा झटका 510 करोड़ की संपत्ति कुर्क, दो प्राइवेट जेट भी जब्त
नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में रिलायंस अनिल अंबानी समूह की **510.17 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क** कर ली हैं। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को की गई इस कार्रवाई में दो चार्टर्ड विमान, जमीन के भूखंड, कार्यालय परिसर, पवन चक्कियां, बैंक खातों में जमा रकम और विभिन्न निवेश शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, समूह से संबंधित अलग-अलग मामलों में अब तक लगभग 23,100 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क या जब्त की जा चुकी हैं।ईडी की ताजा कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामलों में की गई है। जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया है।ईडी के मुताबिक, इस कार्रवाई में दो अलग-अलग मामलों से संबंधित संपत्तियां शामिल हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में 247.12 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। वहीं, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े मामले में 263.05 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया गया है।दोनों मामलों में कुल 510.17 करोड़ रुपये की संपत्ति जांच के दायरे में आई है। एजेंसी का कहना है कि इन परिसंपत्तियों के संबंध में वित्तीय लेनदेन और कथित धनशोधन की जांच की जा रही है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में ईडी ने दो चार्टर्ड विमानों को कुर्क किया है। इनमें डसॉल्ट फाल्कन 2000 और एम्ब्रेयर विमान शामिल बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र में स्थित छह भूखंड और एक कार्यालय परिसर भी कुर्क की गई संपत्तियों में शामिल हैं।रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से संबंधित मामले में तमिलनाडु में स्थित दो पवन चक्कियां कुर्क की गई हैं। इसके साथ ही बैंक खातों की रकम, सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट, विभिन्न निवेश और कंपनियों की प्राप्य राशियों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया गया है।ईडी की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि जांच केवल जमीन और भवन जैसी अचल संपत्तियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी कंपनियों से जुड़े वित्तीय संसाधनों और निवेशों की भी पड़ताल कर रही है। इन संपत्तियों का संबंध कथित वित्तीय अनियमितताओं से किस प्रकार जुड़ता है, इसकी जांच जारी है।प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, संबंधित कंपनियों के खिलाफ जांच की शुरुआत विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर हुई थी। इनमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दिल्ली इकाई, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज मामले शामिल हैं।
इन प्राथमिकियों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त धन के कथित दुरुपयोग तथा वित्तीय लेनदेन में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।जांच एजेंसी ने दावा किया है कि समूह से जुड़ी कुछ कंपनियों के माध्यम से बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त रकम का कथित रूप से अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। ईडी के अनुसार, जांच में सार्वजनिक धन के कथित हस्तांतरण और उसके अंतिम उपयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं।एजेंसी ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया है। ईडी का दावा है कि कुछ कॉरपोरेट संपत्तियों को व्यक्तिगत उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की कोशिश की गई। इसके अलावा भारत से विदेशों में स्थित कम कर वाले क्षेत्रों में धन भेजे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित रूप से स्थानांतरित धन के एक हिस्से का उपयोग प्रमोटरों और उनके परिवार के व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और संबंधित मामलों में अंतिम आपराधिक दोष का निर्धारण अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।अनिल अंबानी समूह से जुड़ी जांच का दायरा काफी व्यापक है। ईडी के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर और रिलायंस कैपिटल सहित कई कंपनियां अलग-अलग जांचों के दायरे में हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि समूह से संबंधित मामलों में अब तक **10 लोगों को गिरफ्तार** किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत छह अभियोजन शिकायतें अदालतों में दाखिल की गई हैं। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के अंतर्गत भी एक शिकायत दर्ज की गई है।ईडी ने फेमा के तहत दो अलग मामलों की जांच किए जाने की जानकारी भी दी है। इस प्रकार जांच का दायरा कथित बैंक धोखाधड़ी के साथ विदेशी मुद्रा संबंधी लेनदेन तक फैला हुआ है।ताजा कार्रवाई के बाद समूह से जुड़े विभिन्न मामलों में कुल कुर्क और जब्त संपत्तियों का मूल्य लगभग 23,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें धन शोधन निवारण अधिनियम और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत की गई कार्रवाइयां शामिल हैं।कानूनी दृष्टि से किसी संपत्ति की अस्थायी कुर्की और उसकी अंतिम जब्ती अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अस्थायी कुर्की के माध्यम से जांच एजेंसी संबंधित संपत्ति के हस्तांतरण या निपटान पर प्रतिबंध लगाती है, ताकि जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही प्रभावित न हो। ऐसी कार्रवाई को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती भी दी जा सकती है।
व्यावसायिक दृष्टिकोण से इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रिलायंस समूह से जुड़ी कई कंपनियां पहले से वित्तीय चुनौतियों और कानूनी विवादों का सामना कर रही हैं। ताजा घटनाक्रम के बाद संबंधित कंपनियों की संपत्तियों, देनदारियों और वित्तीय लेनदेन को लेकर जांच पर फिर ध्यान केंद्रित हो गया है।हालांकि, किसी कंपनी या समूह की संपत्ति कुर्क होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके सभी अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अपराध सिद्ध हो गया है। जांच एजेंसी को अपने आरोपों के समर्थन में अदालत के समक्ष प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।फिलहाल ईडी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित मामलों में आगे की जांच जारी है। एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों के स्वामित्व और कथित धन हस्तांतरण से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।ताजा कार्रवाई से अनिल अंबानी समूह से संबंधित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कानूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। आने वाले समय में जांच एजेंसी की अतिरिक्त कार्रवाई और अदालतों में होने वाली सुनवाई इन मामलों की आगे की दिशा तय करेगी।