नई दिल्ली। दिल्ली में ट्रैफिक चालानों के निपटारे से जुड़े नए नियमों को लेकर वकीलों का विरोध गुरुवार को भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। दिल्ली सरकार द्वारा 14 सितंबर के नोटिफिकेशन के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगाए जाने के बाद अधिकांश जिला अदालत बार एसोसिएशनों ने प्रस्तावित हड़ताल और विरोध मार्च स्थगित कर दिया, लेकिन दिल्ली बार एसोसिएशन (DBA), तीस हजारी ने न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। DBA की मांग है कि केवल दिल्ली में नोटिफिकेशन को रोकना पर्याप्त नहीं है और संबंधित केंद्रीय संशोधन को वापस लिया जाना चाहिए।यह विवाद केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 में हुए बदलाव और दिल्ली में उसे लागू करने के लिए जारी व्यवस्था से जुड़ा है। वकीलों की प्रमुख आपत्ति विवादित ट्रैफिक चालानों के निपटारे की प्रक्रिया में कार्यकारी और विभागीय अधिकारियों की भूमिका तथा अदालत जाने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करने की शर्त को लेकर है।
दिल्ली सरकार ने क्रियान्वयन पर लगाई रोक
वकीलों के विरोध के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कानून मंत्री और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह के साथ जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। इसमें वकीलों ने नए ट्रैफिक चालान तंत्र को लेकर अपनी आपत्तियां और सुझाव सरकार के सामने रखे। इसके बाद दिल्ली सरकार ने 14 सितंबर के नोटिफिकेशन के क्रियान्वयन को अगले निर्णय तक रोकने का फैसला किया।परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि वकीलों की ओर से उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लिया गया है। परिवहन विभाग को प्रतिनिधित्व और सुझावों की समीक्षा करने को कहा गया है। समीक्षा के बाद मामले को मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाएगा। तब तक नया तंत्र दिल्ली में लागू नहीं होगा।सरकार के इस कदम के बाद ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने गुरुवार के लिए प्रस्तावित न्यायिक काम से दूरी और उपराज्यपाल आवास तक विरोध मार्च को स्थगित कर दिया। इसके बाद अन्य बार एसोसिएशनों के वकील काम पर लौट आए।
DBA ने जारी रखा विरोध
हालांकि तीस हजारी की दिल्ली बार एसोसिएशन ने अलग रुख अपनाया। DBA ने गुरुवार को भी न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखने का फैसला किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. डीके शर्मा ने कहा कि वे दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया से संतुष्ट हैं, लेकिन उनके अनुसार मामला यहीं समाप्त नहीं होता। उनका कहना था कि केंद्रीय स्तर पर किए गए संशोधन को वापस लिया जाना चाहिए।DBA का तर्क है कि दिल्ली सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में नोटिफिकेशन के क्रियान्वयन को रोक दिया है, लेकिन केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव केंद्र सरकार से जुड़ा मामला है। इसी आधार पर एसोसिएशन ने केंद्र से संशोधन वापस लेने की मांग करते हुए अपना विरोध जारी रखा।
क्या है नए चालान सिस्टम पर विवाद?
संशोधित नियम 167 के तहत ट्रैफिक चालान मिलने वाले व्यक्ति को चालान स्वीकार कर उसका भुगतान करने या निर्धारित पोर्टल के माध्यम से उसे चुनौती देने का विकल्प मिलता है। चुनौती निर्धारित प्राधिकारी के सामने दस्तावेजी साक्ष्य के साथ 45 दिनों के भीतर दाखिल करनी होती है। तय समय में चुनौती नहीं दिए जाने पर चालान को स्वीकार किया हुआ माना जा सकता है।वकीलों की सबसे बड़ी आपत्ति उस प्रावधान को लेकर है जिसमें निर्धारित प्राधिकारी द्वारा आपत्ति खारिज होने के बाद अदालत जाने के लिए चालान राशि का 50 प्रतिशत पहले जमा करना आवश्यक है। बार एसोसिएशनों का कहना है कि इससे आम लोगों के लिए न्यायिक उपचार हासिल करना अधिक कठिन और खर्चीला हो सकता है। यह वकीलों का पक्ष है; सरकार ने फिलहाल उनकी आपत्तियों की समीक्षा के लिए क्रियान्वयन रोका है।
कार्यकारी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
वकीलों ने नए तंत्र में कार्यकारी और विभागीय अधिकारियों को विवादित चालानों पर निर्णय लेने की भूमिका दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि विवादित चालानों के निपटारे से जुड़े न्यायिक कार्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या अदालतों के दायरे में रहने चाहिए।बार एसोसिएशनों के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों को पहले स्तर पर ऐसे मामलों पर फैसला करने की शक्ति मिलने से न्यायिक प्रक्रिया और कार्यपालिका की भूमिकाओं को लेकर सवाल पैदा होते हैं। उन्होंने संशोधित व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है।
21 सितंबर को भी हुई थी हड़ताल
इससे पहले 21 सितंबर को दिल्ली की सभी सात जिला अदालतों के वकीलों ने एक दिन के लिए न्यायिक कामकाज से दूरी बनाई थी। यह विरोध भी संशोधित नियम 167 और नए ट्रैफिक चालान सिस्टम के खिलाफ था।इसके बाद कोऑर्डिनेशन कमेटी ने 24 सितंबर को तीस हजारी कोर्ट से उपराज्यपाल आवास तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने और न्यायिक कार्य से पूरी तरह दूर रहने की घोषणा की थी।दिल्ली सरकार की ओर से नोटिफिकेशन के क्रियान्वयन को रोकने के बाद यह प्रस्तावित मार्च और सामूहिक हड़ताल स्थगित कर दी गई। हालांकि DBA ने अपना सांकेतिक विरोध जारी रखने का फैसला किया।
अब समीक्षा पर टिकी नजर
फिलहाल दिल्ली में 14 सितंबर के नोटिफिकेशन का क्रियान्वयन रोक दिया गया है। परिवहन विभाग वकीलों की आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करेगा, जिसके बाद सरकार आगे का फैसला करेगी।दूसरी ओर दिल्ली बार एसोसिएशन की मांग है कि संबंधित केंद्रीय संशोधन को वापस लिया जाए। ऐसे में विवाद का अगला चरण केंद्र सरकार के रुख और दिल्ली सरकार की समीक्षा के बाद सामने आने वाले फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल अधिकांश बार एसोसिएशनों ने विरोध स्थगित कर दिया है, जबकि DBA ने अपनी मांग को लेकर न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी है।