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तेजस्वी सूर्या की पत्नी शिवश्री ने साझा किया ट्रेन सफर का अनुभव, सिविक सेंस पर उठाए सवाल

Kavita2
24 Sept 2026 4:49 PM IST
तेजस्वी सूर्या की पत्नी शिवश्री ने साझा किया ट्रेन सफर का अनुभव, सिविक सेंस पर उठाए सवाल
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नई दिल्ली। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी और कर्नाटक संगीत गायिका शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपनी हालिया ट्रेन यात्रा का अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने करीब पांच घंटे की यात्रा को बेहद परेशान करने वाला बताते हुए सार्वजनिक स्थानों पर नागरिक शिष्टाचार और दूसरे लोगों की सुविधा का ध्यान रखने का मुद्दा उठाया। उनकी पोस्ट गुरुवार को सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई।

शिवश्री के मुताबिक, वह जिस ट्रेन कोच में यात्रा कर रही थीं, उसमें कुल 56 सीटें थीं। उसी कोच में करीब 40 अधेड़ उम्र के पुरुषों का एक समूह भी यात्रा कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि समूह के सदस्य लगभग पूरी पांच घंटे की यात्रा के दौरान तेज आवाज में बातचीत करते रहे और हंसी-मजाक करते रहे, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई।

शिवश्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को दूसरे यात्रियों की सुविधा और निजी जगह का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक, ट्रेन जैसे साझा सार्वजनिक परिवहन में लगातार तेज आवाज में बातचीत करना या चिल्लाना आसपास मौजूद दूसरे यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

पांच घंटे की यात्रा में नहीं मिली शांति

शिवश्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव का जिक्र करते हुए यात्रा को बेहद तनावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के रूप में उनके मन में कई तरह के विचार चलते रहते हैं और उन्हें शांत वातावरण पसंद है। लेकिन यात्रा के दौरान लगातार शोर होने के कारण उन्हें अपेक्षित शांति नहीं मिल सकी।

उनका कहना था कि किसी बड़े समूह के साथ यात्रा करते समय शुरुआती उत्साह और बातचीत को समझा जा सकता है, लेकिन यदि वही स्थिति घंटों तक जारी रहे तो दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

शिवश्री के अनुसार, 56 सीट वाले कोच में करीब 40 लोगों का समूह होने के कारण बाकी यात्रियों के पास सीमित विकल्प थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संख्या में कम होने के कारण दूसरे यात्रियों को शोर और असुविधा चुपचाप सहनी चाहिए।

TTE से मांगी दूसरे कोच में सीट

शिवश्री ने अपनी परेशानी दूर करने के लिए टिकट परीक्षक यानी TTE से भी संपर्क किया। उन्होंने दूसरे कोच में सीट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन ट्रेन में कोई दूसरी सीट खाली नहीं होने के कारण उनका स्थान बदलना संभव नहीं हो सका।

इसके बाद उन्होंने TTE से कोच में हो रहे शोर को लेकर शिकायत की। शिवश्री के मुताबिक, समूह में शामिल कुछ लोग UNO खेल रहे थे और इस दौरान भी तेज आवाज में बातचीत और हंसी-मजाक जारी था।

शिकायत के बाद TTE ने समूह को समझाने की कोशिश की। शिवश्री ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि कुछ समय बाद समूह के सदस्यों ने TTE के साथ भी मजाक किया और उन्हें अपने साथ खेलने के लिए कहा। बाद में समूह के कुछ लोगों ने बॉलीवुड गाने भी गाए। यह पूरा विवरण शिवश्री द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके अनुभव पर आधारित है।

सिविक सेंस को बनाया मुख्य मुद्दा

शिवश्री ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी खेल या सामान्य बातचीत को लेकर नहीं थी, बल्कि उनका मुख्य मुद्दा सार्वजनिक स्थानों पर दूसरे लोगों की सुविधा का सम्मान करना था।

उन्होंने अपनी पोस्ट में नागरिक शिष्टाचार यानी सिविक सेंस को लेकर सवाल उठाया। उनके मुताबिक, सार्वजनिक स्थान हर व्यक्ति के लिए होते हैं और वहां मौजूद लोगों को अपने व्यवहार का दूसरे लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े समूह के सामने अक्सर दूसरे यात्री आपत्ति जताने में असहज महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में बाकी लोगों को शोर या असुविधा सहनी पड़ती है।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा

शिवश्री की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक परिवहन में व्यवहार और सिविक सेंस को लेकर चर्चा शुरू हो गई। उनकी बात का केंद्र ट्रेन यात्रा के दौरान यात्रियों के बीच आपसी सम्मान और सार्वजनिक स्थानों पर जिम्मेदार व्यवहार रहा।

यह मुद्दा केवल ट्रेनों तक सीमित नहीं है। बस, मेट्रो, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में अलग-अलग जरूरतों वाले लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे में सार्वजनिक जगह पर व्यक्तिगत व्यवहार और दूसरे लोगों की सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

शिवश्री ने अपने अनुभव के माध्यम से इसी पहलू को सामने रखा कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करते समय व्यक्ति का व्यवहार केवल उसके अपने समूह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर आसपास मौजूद अन्य यात्रियों पर भी पड़ता है।

पोस्ट के आखिर में जताई निराशा

अपनी पोस्ट के अंत में शिवश्री ने पूरे अनुभव पर निराशा जताते हुए सवाल किया कि देश में सार्वजनिक स्थानों पर लोगों का व्यवहार कब बेहतर होगा। उन्होंने इस घटना को व्यक्तिगत असुविधा से आगे बढ़कर नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ा।

हालांकि सोशल मीडिया पर किसी घटना को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन शिवश्री की पोस्ट ने सार्वजनिक परिवहन में शोर, व्यक्तिगत जगह और यात्रियों के आपसी व्यवहार जैसे विषयों को चर्चा में ला दिया है।

पांच घंटे की इस यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए शिवश्री ने यही संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक स्थान पर मौजूद हर व्यक्ति की सुविधा का ध्यान रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों के बीच आपसी सम्मान और सामान्य शिष्टाचार सफर को सभी के लिए बेहतर बना सकता है।

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