नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी के जीवन का सफर आज भी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उनके 100वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके व्यक्तित्व, राजनीतिक जीवन, संगठन के प्रति समर्पण और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक रहा है। राजनीति में जिस मर्यादा, ईमानदारी और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है, उसका उदाहरण आडवाणी जी के व्यक्तित्व में देखने को मिलता है।रविवार, 8 नवंबर को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा और हवन के साथ हुई। इसके बाद आडवाणी के जीवन, राजनीतिक सफर और उनके महत्वपूर्ण भाषणों पर आधारित करीब 20 मिनट की विशेष वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई। इस आयोजन का उद्देश्य उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, राष्ट्र के प्रति योगदान और भाजपा संगठन को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका को याद करना था।
राजनीति में मर्यादा और ईमानदारी की मिसाल हैं आडवाणी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि आज के समय में राजनीति में मर्यादा, शुचिता और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि नई पीढ़ी को इन मूल्यों को किसी व्यक्तित्व से सीखना है, तो लालकृष्ण आडवाणी इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। उनका व्यक्तित्व ईमानदारी और राजनीतिक प्रतिबद्धता की मिसाल है।उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से आडवाणी जी के साथ काम करने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उनके साथ काम कर चुके लोगों से उनके कार्य करने के तरीके के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला है। उनके काम में हमेशा संकल्प, समर्पण और प्रतिबद्धता दिखाई देती थी। नितिन नवीन ने कहा कि आज की पीढ़ी को आडवाणी के जीवन और उनके कार्यों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व अलग-अलग थे, लेकिन दोनों के बीच साझा लक्ष्य के लिए मिलकर काम करने की अद्भुत क्षमता थी। दोनों नेताओं ने पार्टी के भविष्य के लिए जिस तरह संकल्प और एकजुटता के साथ काम किया, उससे भाजपा को देशव्यापी पहचान और विस्तार मिला।
दो सांसदों वाली पार्टी से देशव्यापी संगठन तक का सफर
नितिन नवीन ने भाजपा के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की जाती थीं। जनता पार्टी के बाद भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई और शुरुआती चुनाव में पार्टी को केवल दो लोकसभा सीटें मिली थीं। उस समय पार्टी के सामने संगठन को मजबूत बनाने और देशभर में अपनी पहचान स्थापित करने की बड़ी चुनौती थी।उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने निराशा के उस दौर में भी पार्टी के लिए उम्मीद की किरण जगाई। दोनों नेताओं के संकल्प और नेतृत्व ने संगठन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भाजपा अध्यक्ष के अनुसार, आडवाणी जी में संगठन के प्रति संवेदनशीलता के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता भी थी।उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे दोनों वरिष्ठ नेताओं के जीवन से सीख लें और संगठन के प्रति समर्पण तथा सामूहिक लक्ष्य के लिए काम करने की भावना को अपने आचरण में उतारें।
राम रथ यात्रा और राम मंदिर आंदोलन का किया उल्लेख
अपने संबोधन में नितिन नवीन ने लालकृष्ण आडवाणी की ऐतिहासिक राम रथ यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई इस यात्रा ने देश की राजनीति और राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।उन्होंने बिहार के समस्तीपुर में आडवाणी की यात्रा रोके जाने की घटना को याद करते हुए कहा कि उस समय पूरा देश इस घटनाक्रम से प्रभावित हुआ था। यात्रा को रोके जाने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन आगे बढ़ता रहा। नितिन नवीन ने कहा कि इस यात्रा और उससे जुड़े आंदोलन को आगे बढ़ाने में देशभर के कारसेवकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।उन्होंने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश ने उस लंबे सफर का परिणाम देखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस यात्रा के आगे बढ़ने की बात भी कही। उनके अनुसार, आडवाणी जी के योगदान को याद करने के लिए यह अवसर विशेष महत्व रखता है।
विभाजन की पीड़ा के बावजूद नहीं डिगा राष्ट्र के प्रति संकल्प
नितिन नवीन ने आडवाणी के जीवन के शुरुआती संघर्षों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने देश के विभाजन की पीड़ा झेली, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया। राष्ट्र प्रथम की भावना को उन्होंने अपने जीवन का आधार बनाया और सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रहे।लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था, जो वर्तमान में पाकिस्तान में है। विभाजन के बाद उन्हें अपना घर छोड़कर भारत आना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन नए सिरे से शुरू किया और धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।उन्होंने जनसंघ को मजबूत करने से लेकर भारतीय जनता पार्टी के निर्माण और विस्तार तक लंबी राजनीतिक यात्रा तय की। आपातकाल के दौरान भी उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में अपनी भूमिका निभाई। बाद में केंद्र सरकार में गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए देश की सेवा की।
प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं
आडवाणी के 100वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने एक विशेष लेख के माध्यम से उनके राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में योगदान को याद किया। उन्होंने विभाजन की पीड़ा, जनसंघ को मजबूत करने, भाजपा के निर्माण, आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के लिए खड़े होने और सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा का उल्लेख किया।भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। सभी ने उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठन के प्रति समर्पण को याद किया।गौरतलब है कि लालकृष्ण आडवाणी ने 8 नवंबर 2026 को अपना 99वां जन्मदिन मनाया और जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश किया। वर्ष 2024 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनका राजनीतिक जीवन भारतीय राजनीति और भाजपा के संगठनात्मक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।नितिन नवीन के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि राजनीति में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण सिद्धांत, ईमानदारी, संगठन के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण है। उन्होंने आडवाणी के जीवन को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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