नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया गया था, लेकिन उस दौरान भी राजनीतिक विरोधियों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया। ललन सिंह ने कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
1974 के आंदोलन का दिया उदाहरण
ललन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 1974 के आंदोलन के दौरान उन्होंने और उनके साथियों ने इंदिरा गांधी सरकार की नीतियों का विरोध किया था। उस समय सरकार के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन हुआ, लेकिन विरोध के दौरान व्यक्तिगत टिप्पणियों और अपमानजनक भाषा से बचने का प्रयास किया गया।उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।ललन सिंह ने सवाल उठाया कि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष से इस तरह की बयानबाजी की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की भाषा लगातार राजनीतिक मर्यादाओं से दूर होती जा रही है।
मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी पर विवाद
दरअसल, बिहार की राजधानी पटना में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।कार्यक्रम में भाषण के दौरान एक व्यक्ति ने कहा था कि मोदी कभी नहीं जाएंगे। इसके जवाब में खड़गे ने प्रधानमंत्री को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे भाजपा और एनडीए के नेताओं ने आपत्तिजनक बताया।इस बयान के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना शुरू कर दी। कई नेताओं ने खड़गे से अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग की है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
ललन सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करता रहा हैउन्होंने दरभंगा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में आयोजित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भी प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर अभद्र टिप्पणी का विवाद सामने आया था।ललन सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों के नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक संवाद की मर्यादा का पालन नहीं करने का आरोप लगाया।
एनडीए के अन्य नेताओं ने भी की आलोचना
खड़गे के बयान को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, प्रह्लाद जोशी और जदयू सांसद संजय झा सहित एनडीए के कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्होंने भी इंदिरा गांधी की सरकार का विरोध किया था, लेकिन उस समय इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया गया। वहीं, प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।एनडीए नेताओं का कहना है कि राजनीतिक असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी को लेकर बढ़ी बहस
कांग्रेस अध्यक्ष के बयान और उस पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद राजनीतिक भाषा और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा को लेकर बहस तेज हो गई है।ललन सिंह ने कहा कि 1974 के आंदोलन से यह सीख मिलती है कि सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध करते हुए भी राजनीतिक शिष्टाचार बनाए रखा जा सकता है।फिलहाल खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और एनडीए के अन्य दल कांग्रेस से जवाब मांग रहे हैं। यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सार्वजनिक संवाद के स्तर को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
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