ब्रिटानिया की '100% होल व्हीट ब्रेड' पर सवाल, CCPA ने लगाया ₹1 लाख जुर्माना
नई दिल्ली। पैकेट पर लिखे दावे और उत्पाद में मौजूद सामग्री को लेकर ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कंपनी पर अपनी ब्रेड को '100% होल व्हीट ब्रेड' बताने वाले भ्रामक विज्ञापन के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण की जांच में सामने आया कि जिस ब्रेड का प्रचार पूरी तरह साबुत गेहूं से बनी बताकर किया जा रहा था, उसमें गेहूं का आटा केवल 62 प्रतिशत था। बाकी हिस्से में पानी, यीस्ट, गेहूं का चोकर और अन्य सामग्री शामिल थी। CCPA ने कंपनी को विवादित विज्ञापन तत्काल बंद करने और आदेश के 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला ब्रिटानिया की उस ब्रेड से जुड़ा है, जिसके पैकेट और प्रचार सामग्री में '100% होल व्हीट ब्रेड' तथा '0% मैदा' जैसे दावे किए गए थे।
उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने उत्पाद की पैकेजिंग, कंपनी की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर किए गए प्रचार का संज्ञान लेकर जांच कराई।
जांच में पाया गया कि उत्पाद में होल व्हीट आटा कुल संरचना का लगभग 62 से 62.5 प्रतिशत था। शेष हिस्से में पानी, यीस्ट, गेहूं का चोकर और अन्य सामग्री शामिल थी।
प्राधिकरण के अनुसार, जब किसी उत्पाद पर प्रमुखता से '100%' लिखा जाता है, तो सामान्य उपभोक्ता उससे यह समझ सकता है कि पूरा उत्पाद उसी सामग्री से बना है। इसलिए ब्रेड की वास्तविक संरचना और विज्ञापन में किए गए दावे के बीच अंतर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता था।
CCPA ने क्यों लगाया जुर्माना?
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने 22 अक्टूबर 2026 के आदेश में कंपनी के विज्ञापन को भ्रामक माना।
प्राधिकरण का कहना था कि '100% होल व्हीट ब्रेड' शब्दावली उपभोक्ताओं के सामने उत्पाद की संरचना को लेकर ऐसा संदेश देती है, जो उसकी वास्तविक सामग्री से मेल नहीं खाता।
प्राधिकरण ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। इसके लिए कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
आदेश में यह भी कहा गया कि विवादित विज्ञापनों को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों से तत्काल हटाया जाए। कंपनी को निर्देशों के पालन की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।
कंपनी ने क्या सफाई दी?
जांच के दौरान ब्रिटानिया ने अपने दावे का बचाव करते हुए कहा कि '100%' का इस्तेमाल ब्रेड में इस्तेमाल होने वाले आटे के संदर्भ में किया गया था। कंपनी के अनुसार, इसका आशय यह बताना था कि गेहूं से बने आटे के स्थान पर मैदा या किसी दूसरे प्रकार के आटे का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि ब्रेड बनाने के लिए पानी, यीस्ट, नमक और अन्य अनुमत सामग्री की जरूरत होती है। इसलिए तैयार उत्पाद में केवल आटा ही नहीं हो सकता।
हालांकि, CCPA ने कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण के अनुसार, जब उत्पाद को '100% होल व्हीट ब्रेड' कहा जाता है, तो सामान्य उपभोक्ता इसका अर्थ पूरे उत्पाद की संरचना से जोड़ सकता है, न कि केवल उसमें इस्तेमाल किए गए आटे के प्रकार से।
'100% होल व्हीट' के दावे पर क्यों उठे सवाल?
खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल होने वाले शब्द उपभोक्ताओं के खरीदारी संबंधी फैसलों को प्रभावित करते हैं। खासकर स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े दावे लोगों को किसी उत्पाद को दूसरे विकल्पों की तुलना में बेहतर मानने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
CCPA ने माना कि किसी उत्पाद पर बड़े अक्षरों में '100%' लिखने से उसके पूरी तरह उसी सामग्री से बने होने का प्रभाव पड़ सकता है।
ब्रेड के पैकेट पर छोटे अक्षरों में दी गई अतिरिक्त जानकारी भी इस समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी गई, क्योंकि मुख्य दावा उपभोक्ता का ध्यान सबसे पहले आकर्षित करता है।
प्राधिकरण ने यह भी कहा कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावे स्पष्ट, सही और प्रमाणित होने चाहिए।
खाद्य मानकों में क्या है प्रावधान?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के अनुसार, 'होल व्हीट ब्रेड' के रूप में बेचे जाने वाले उत्पाद में कम से कम 75 प्रतिशत होल व्हीट आटा होना चाहिए।
CCPA की जांच में संबंधित ब्रिटानिया उत्पाद में गेहूं के आटे की मात्रा लगभग 62 प्रतिशत पाई गई, जो इस सीमा से कम है।
इस मामले में FSSAI ने भी '100%' शब्द के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई थी और खाद्य कारोबारियों को ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी, जो उत्पाद की वास्तविक संरचना के बारे में गलत धारणा पैदा कर सकते हैं।
कंपनी को अब क्या करना होगा?
CCPA के आदेश के अनुसार, ब्रिटानिया को भ्रामक विज्ञापन तत्काल बंद करना होगा। यह निर्देश प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया सहित सभी प्रचार माध्यमों पर लागू है।
कंपनी को आदेश के पालन की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण को सौंपनी होगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक उत्पाद के बारे में सही जानकारी पहुंचे और विज्ञापनों में ऐसे दावों का इस्तेमाल न हो, जो उसकी वास्तविक संरचना से मेल नहीं खाते।
हालांकि जुर्माने की राशि केवल एक लाख रुपये है, लेकिन इस कार्रवाई का महत्व खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापन के मानकों को लेकर है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सीख?
यह मामला बताता है कि खाद्य उत्पाद खरीदते समय केवल पैकेट पर लिखे बड़े दावों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
उपभोक्ताओं को सामग्री की सूची, पोषण संबंधी जानकारी और उत्पाद की वास्तविक संरचना भी देखनी चाहिए।
'100%', 'जीरो' या 'पूरी तरह प्राकृतिक' जैसे शब्द उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर विशेष धारणा पैदा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे दावों को समझते समय पैकेट पर दी गई विस्तृत जानकारी पढ़ना उपयोगी होता है।
खाद्य कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे उत्पाद की खूबियों को सही और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करें।
ब्रिटानिया पर लगाया गया एक लाख रुपये का जुर्माना खाद्य उत्पादों के विज्ञापन में पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। CCPA का स्पष्ट संदेश है कि उत्पाद की वास्तविक संरचना और विज्ञापन में किए गए दावे के बीच अंतर उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं करना चाहिए।