केरल का नाम अब होगा ‘केरलम’, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिल को दी मंजूरी
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद अब यह विधेयक कानून बन गया है और आधिकारिक तौर पर राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
केरल विधानसभा की ओर से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। लंबे समय से इस मांग को लेकर चर्चा चल रही थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केरल का नाम आधिकारिक दस्तावेजों में ‘केरलम’ के रूप में दर्ज किया जाएगा।
विधानसभा ने 2024 में पास किया था प्रस्ताव
राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में एक प्रस्ताव पारित किया था।
इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया था कि राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए।
गृह राज्य मंत्री ने बताया कि विधेयक में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि केरल राज्य को अब ‘केरलम राज्य’ के नाम से जाना जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से केरल राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया था।
केंद्र को भेजा गया था प्रस्ताव
केरल सरकार ने राज्य विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को जून 2024 में केंद्र सरकार के पास भेजा था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इस मामले को आगे बढ़ाया। नाम परिवर्तन से जुड़े विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक पर विचार करने के बाद इसे राज्य विधानसभा की राय जानने के लिए वापस भेजा था।
इसके बाद केरल विधानसभा ने विधेयक पर सहमति जताते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
मलयालम पहचान से जुड़ा है ‘केरलम’
केरल सरकार और विधानसभा का कहना है कि ‘केरलम’ नाम राज्य की स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान के ज्यादा करीब है।
मलयालम भाषा में राज्य को आमतौर पर ‘केरलम’ कहा जाता है। नाम परिवर्तन का उद्देश्य राज्य की ऐतिहासिक और भाषाई पहचान को आधिकारिक मान्यता देना बताया गया है।
राज्य सरकार लंबे समय से इस मांग को आगे बढ़ा रही थी कि अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में इस्तेमाल होने वाले ‘केरल’ नाम के स्थान पर स्थानीय उच्चारण ‘केरलम’ को अपनाया जाए।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ बदलाव
किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत प्रक्रिया अपनाई जाती है।
इसके लिए संसद में विधेयक लाया जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही यह कानून बनता है।
इस मामले में भी केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
राज्य सरकार ने जताई थी सहमति
केरल सरकार ने राज्य के नाम परिवर्तन को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था, जिसे सभी दलों की सहमति से पारित किया गया।
सरकार का कहना था कि ‘केरलम’ नाम राज्य की संस्कृति, भाषा और परंपरा को बेहतर तरीके से दर्शाता है।
विधानसभा की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने मामले की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की।
नाम बदलने के बाद होंगे प्रशासनिक बदलाव
अब कानून लागू होने के बाद धीरे-धीरे सरकारी रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में बदलाव किए जाएंगे।
राज्य के नाम से जुड़े विभागीय रिकॉर्ड, सरकारी वेबसाइट, पहचान दस्तावेजों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में नए नाम का इस्तेमाल किया जाएगा।
हालांकि, यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू होगा।
देश में पहले भी बदले गए हैं राज्यों के नाम
भारत में इससे पहले भी कई राज्यों और शहरों के नाम बदले जा चुके हैं। नाम परिवर्तन अक्सर भाषा, संस्कृति, इतिहास या स्थानीय पहचान से जुड़े कारणों से किए जाते रहे हैं।
केरल का नाम ‘केरलम’ किया जाना भी इसी तरह की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा फैसला माना जा रहा है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब केरल आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ कहलाएगा और राज्य की पहचान में एक नया अध्याय जुड़ गया है।