नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सिब्बल ने वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को लेकर मिले नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या अब उनकी नागरिकता भी "संदिग्ध" मानी जा रही है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि इस तरह की कार्रवाई जारी रही तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज पर नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि कई वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं या उनकी नागरिकता और मतदाता पहचान को लेकर अनावश्यक जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची का सही और निष्पक्ष होना बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी नागरिक के मतदान अधिकार को प्रभावित करने से पहले पूरी पारदर्शिता जरूरी है।
सिब्बल ने कहा कि उन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़ा एक नोटिस प्राप्त हुआ है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा। उन्होंने कहा, "सबसे पहले मैं ज्ञानेश कुमार को बधाई देता हूं। उन्हें लगता है कि मेरी नागरिकता संदिग्ध है।" उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग के सामने उन तथ्यों को रखना चाहते हैं, जिनके कारण देश में इस तरह की स्थिति पैदा हो रही है।
कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तो इसका असर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उससे निष्पक्षता एवं पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी भी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर मतदाता अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
सिब्बल ने कहा कि जिस तरीके से वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर यह मामला आगे बढ़ता है तो न्यायपालिका के सामने भी इसे उठाया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि मतदाता सूची में संशोधन और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर कानूनी चुनौती दी जा सकती है।
गौरतलब है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट करता है, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और रिकॉर्ड में सुधार करना शामिल होता है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से सवाल भी उठाए जाते रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी या मनमानी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय हो सकता है।
उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और जिन लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, उन्हें उचित अवसर दिया जाए ताकि वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।
सिब्बल का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी नेताओं की ओर से कई बार मतदाता सूची में संभावित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए अपनी प्रक्रियाओं को जरूरी बताता रहा है।
राज्यसभा सांसद ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर योग्य नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की जल्दबाजी या अस्पष्ट प्रक्रिया से बचना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि यदि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई तो वह इस मुद्दे को न्यायिक मंच पर ले जाएंगे। उनके बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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