मंडी। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत का एक बार फिर बेबाक अंदाज देखने को मिला है। इस बार उनका गुस्सा किसी राजनीतिक विरोधी पर नहीं बल्कि सरकारी अधिकारियों पर फूटा। मंडी में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी DISHA की बैठक में सांसद निधि के तहत उपलब्ध रकम के धीमे इस्तेमाल को लेकर कंगना नाराज हो गईं। उन्होंने अधिकारियों से सवाल-जवाब करते हुए यहां तक कह दिया कि उन्हें हर बैठक में केवल जुमले सुनने को मिल रहे हैं और अब उन्हें ऐसे जवाब नहीं चाहिए।
बैठक का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कंगना अधिकारियों से विकास कार्यों और सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगती दिखाई दे रही हैं। उनका कहना था कि सांसद का काम विकास कार्यों के लिए पैसा उपलब्ध कराना और उनकी सिफारिश करना है, लेकिन अगर अधिकारी उस रकम का समय पर इस्तेमाल नहीं करेंगे तो जनता तक उसका फायदा कैसे पहुंचेगा।
कंगना ने दावा किया कि सांसद निधि में उपलब्ध करीब 11 करोड़ रुपये में से बेहद कम रकम खर्च हुई। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि बैठकों में उन्हें फंड के इस्तेमाल को लेकर संतोषजनक स्थिति बताई जाती रही, जबकि वास्तविक आंकड़े अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
DISHA बैठक में गर्म हुआ माहौल
मंडी में DISHA समिति की बैठक विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। इस तरह की बैठकों में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की जाती है।
कंगना रनौत बैठक की अध्यक्षता करते हुए अलग-अलग विभागों के कामकाज की जानकारी ले रही थीं। इसी दौरान MPLADS यानी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के फंड के इस्तेमाल का मुद्दा उठा।
फंड खर्च होने की स्थिति की जानकारी मिलने पर कंगना संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने अधिकारियों से विस्तार से जवाब मांगा।
उनकी नाराजगी तब और बढ़ गई जब उन्हें लगा कि बैठकों में जो जानकारी दी जा रही है वह जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाती।
‘ये फालतू के जुमले मत देना मुझे’
बैठक के दौरान कंगना रनौत ने तल्ख लहजे में अधिकारियों को कहा कि उन्हें फालतू के जुमले नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर DISHA कमेटी की बैठक में उन्हें इसी तरह के जवाब सुनने को मिलते हैं लेकिन फंड का वास्तविक इस्तेमाल अपेक्षा के मुताबिक नहीं हो रहा।
कंगना ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब विकास के लिए पैसा उपलब्ध है तो उसे खर्च करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
उनका कहना था कि अगर सांसद की ओर से पैसा दिया जा चुका है और विकास कार्यों की सिफारिश हो चुकी है तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारा जाए।
11 करोड़ के फंड का उठाया मुद्दा
कंगना रनौत ने बैठक में सांसद निधि से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से तीखे सवाल किए।
उन्होंने दावा किया कि करीब 11 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद मार्च-अप्रैल तक बेहद कम रकम का इस्तेमाल हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंगना ने कहा कि मंडी क्षेत्र में भी लगभग 50 से 60 लाख रुपये के आसपास ही इस्तेमाल होने की स्थिति सामने आई थी।
इस धीमी प्रगति पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि आखिर विकास योजनाओं में पैसा खर्च क्यों नहीं हो पा रहा।
उनका कहना था कि जब पैसा उपलब्ध है तो विकास कार्यों को रोकने या अनावश्यक रूप से लंबित रखने का कोई कारण नहीं होना चाहिए।
मंत्रालय से पत्र भेजने की बात कही
कंगना ने दावा किया कि सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर मंत्रालय की तरफ से भी कई बार पत्र भेजने पड़े।
उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि क्या मंत्रालय के अधिकारियों के पास यही काम रह गया है कि वे लगातार फंड के इस्तेमाल को लेकर पत्र भेजते रहें।
उनकी नाराजगी का मुख्य कारण यह था कि विकास के लिए उपलब्ध पैसा समय पर इस्तेमाल नहीं होने से परियोजनाएं प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि सांसद का काम विकास के लिए राशि उपलब्ध कराना है लेकिन उसे जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक व्यवस्था की है।
अधिकारियों से मांगी परफॉर्मेंस रिपोर्ट
कंगना रनौत ने केवल नाराजगी ही नहीं जताई बल्कि अधिकारियों से कामकाज की रिपोर्ट भी मांगी।
उन्होंने विकास कार्यों और फंड के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट परफॉर्मेंस रिपोर्ट देने को कहा।
सांसद ने सवाल किया कि किस विभाग को कितना पैसा दिया गया, कितनी रकम खर्च हुई और कौन से काम अभी तक लंबित हैं।
इस तरह की जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकता है कि देरी किस स्तर पर हो रही है।
कंगना ने अधिकारियों को संकेत दिया कि अब केवल मौखिक जवाब से काम नहीं चलेगा बल्कि वास्तविक काम और खर्च के आंकड़े भी दिखाने होंगे।
एक दिन ऑफिस दे दो सारे काम करके दिखा दूंगी’
बैठक में कंगना का गुस्सा इस हद तक बढ़ गया कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अगर उन्हें एक दिन के लिए उनका कार्यालय मिल जाए तो वह सारे काम करके दिखा देंगी।
उनका यह बयान प्रशासनिक कामकाज की धीमी गति पर नाराजगी के तौर पर सामने आया।
कंगना ने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
उनका जोर इस बात पर था कि सरकारी मशीनरी को जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए।
अधिकारियों की ‘एक्टिंग’ पर भी कसा तंज
अभिनेत्री से सांसद बनीं कंगना रनौत ने बैठक के दौरान अपने फिल्मी पेशे का जिक्र करते हुए अधिकारियों पर तंज भी कसा।
उन्होंने कहा कि अधिकारी उनसे भी अच्छी एक्टिंग करते हैं।
उनका इशारा उन आश्वासनों की ओर था जो कथित तौर पर पिछली बैठकों में दिए गए थे।
कंगना के मुताबिक उन्हें बताया जाता रहा कि काम सही तरीके से चल रहा है और फंड का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है, लेकिन वास्तविक आंकड़ों को देखने पर तस्वीर अलग नजर आई।
उन्होंने इसी अंतर को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
मीडिया में आलोचना का भी किया जिक्र
कंगना रनौत ने बैठक में यह भी कहा कि सांसद के तौर पर उनके काम को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर सवाल उठते हैं।
उनका कहना था कि लोग अधूरे या लंबित विकास कार्यों को लेकर वीडियो और रील बनाते हैं और फिर सांसद से जवाब मांगते हैं।
ऐसे में अगर प्रशासनिक स्तर पर योजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं तो राजनीतिक प्रतिनिधि को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ता है।
कंगना ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों में देरी की वजह से उनकी छवि और कामकाज को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
MPLADS आखिर क्या है?
MPLADS यानी Members of Parliament Local Area Development Scheme के तहत सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
इन कार्यों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुविधाएं और अन्य स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हो सकते हैं।
सांसद सीधे इस राशि को खर्च नहीं करते। वे विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं और प्रशासनिक एजेंसियां निर्धारित नियमों के तहत इन कार्यों को लागू करती हैं।
इसलिए किसी परियोजना की सिफारिश होने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
फंड उपलब्ध लेकिन खर्च नहीं तो क्या समस्या?
विकास निधि का समय पर इस्तेमाल नहीं होने से सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय लोगों को होता है।
मान लीजिए किसी गांव में सड़क, सामुदायिक भवन या दूसरी सुविधा के लिए सांसद ने राशि की सिफारिश कर दी लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी हो गई। ऐसी स्थिति में पैसा उपलब्ध होने के बावजूद लोगों को सुविधा नहीं मिल पाती।
कई बार जमीन, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर, विभागीय अनुमति या दूसरी प्रक्रियाओं की वजह से काम में देरी हो सकती है।
यही वजह है कि DISHA जैसी बैठकों में अलग-अलग योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाती है।
फंड में गड़बड़ी के भी लगाए आरोप
बैठक में कंगना रनौत ने फंड के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने एजेंसियों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि फंड का एक हिस्सा कथित तौर पर गलत लोगों तक पहुंचा और उसकी वसूली नहीं हो पाई।
यह कंगना रनौत द्वारा बैठक में लगाया गया आरोप है। इस संबंध में स्वतंत्र जांच या अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने पर ही किसी वित्तीय अनियमितता को स्थापित तथ्य माना जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने और पैसा वापस लेने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा।
सांसद ने पूछा आखिर जवाबदेही किसकी?
बैठक में कंगना का जोर जवाबदेही पर रहा।
उनका सवाल था कि अगर विकास कार्यों के लिए पैसा दिया गया लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
सांसद ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी मांगी कि किन योजनाओं में देरी हुई और उसके पीछे क्या कारण रहे।
उनका कहना था कि हर बैठक में केवल आश्वासन देने से विकास नहीं होगा।
जनता के लिए उपलब्ध राशि का सही और समय पर इस्तेमाल होना जरूरी है।
DISHA कमेटी की क्या भूमिका?
DISHA का पूरा नाम District Development Coordination and Monitoring Committee है।
इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की विभिन्न विकास और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी तथा बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
बैठक में जनप्रतिनिधियों के साथ जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं।
यहां योजनाओं की प्रगति, फंड के इस्तेमाल और जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं पर चर्चा होती है।
मंडी की बैठक में भी यही समीक्षा हो रही थी जब सांसद निधि के इस्तेमाल का मुद्दा सामने आया और कंगना अधिकारियों पर नाराज हो गईं।
विकास कार्यों में तेजी लाने का निर्देश
कंगना ने अधिकारियों को विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उनका कहना था कि अगर पैसा मौजूद है तो योजनाएं लंबे समय तक कागजों में नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लंबित कामों को जल्द पूरा करने और फंड के इस्तेमाल में तेजी लाने को कहा।
साथ ही सांसद ने अगली समीक्षा बैठक तक प्रगति दिखाने की अपेक्षा जताई।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
DISHA बैठक में कंगना की नाराजगी का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया।
वीडियो में उनका तीखा अंदाज दिखाई दे रहा है। खासकर ‘फालतू के जुमले मत देना’ वाली टिप्पणी सोशल मीडिया पर सुर्खियां बनी।
कुछ यूजर्स उनके सख्त रवैये का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ उनकी भाषा और अधिकारियों से बात करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि बैठक का मुख्य मुद्दा सांसद निधि का धीमा इस्तेमाल और विकास कार्यों की प्रगति था।
पहले भी बेबाक बयानों से रही हैं चर्चा में
फिल्मों से राजनीति में आईं कंगना रनौत अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर मंडी सीट से जीत हासिल की थी।
सांसद बनने के बाद भी वह विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लगातार बयान देती रही हैं।
लेकिन इस बार मामला किसी विपक्षी नेता या राजनीतिक विवाद से जुड़ा नहीं था। उन्होंने अपने ही संसदीय क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई।
जनता के काम पर फोकस करने की नसीहत
बैठक में कंगना का मुख्य संदेश था कि अधिकारियों को जनता से जुड़े विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि योजनाओं और फंड के बारे में केवल आंकड़े बताने के बजाय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि काम वास्तव में जमीन पर दिखाई दें।
किसी सड़क, भवन या दूसरी सुविधा के लिए राशि जारी होने के बाद अगर काम वर्षों तक पूरा नहीं होता तो आम लोगों के बीच प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों की जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।
इसी कारण उन्होंने अधिकारियों को काम की रफ्तार बढ़ाने को कहा।
क्यों भड़कीं कंगना रनौत?
पूरे विवाद का सार यही है कि कंगना रनौत **MPLADS फंड के धीमे इस्तेमाल** को लेकर अधिकारियों से नाराज थीं।
उनका दावा था कि उपलब्ध करीब 11 करोड़ रुपये के मुकाबले बहुत कम रकम खर्च हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली बैठकों में उन्हें फंड इस्तेमाल की स्थिति को लेकर जो आश्वासन दिए गए थे वे वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खा रहे।
इसी बात पर सांसद का गुस्सा बढ़ा और उन्होंने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि उन्हें अब ‘फालतू के जुमले’ नहीं चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से परफॉर्मेंस रिपोर्ट मांगी और लंबित विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
मंडी की DISHA बैठक का यह घटनाक्रम अब राजनीतिक बयान से ज्यादा प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल को लेकर चर्चा में है। सांसद निधि में कितना पैसा वास्तव में खर्च हुआ, कितना लंबित है और जिन परियोजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराई गई उनका काम कहां तक पहुंचा है—इन सवालों पर अब स्थानीय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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