नई दिल्ली। देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। रविवार, 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कथित भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आयोग के अधिकारियों से इस्तीफा देने और अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग की। बनर्जी ने कहा कि पूरे देश में भ्रष्टाचार को लेकर इतने गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित लोगों को पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देना चाहिए और जवाबदेही तय करनी चाहिए।कल्याण बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। रविवार को इंडिया गठबंधन की रैली में भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
कल्याण बनर्जी ने अधिकारी की नियुक्तियों पर भी उठाए सवाल
रैली के दौरान कल्याण बनर्जी ने एक पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) का जिक्र करते हुए उनकी नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर था, वह बाद में मुख्यमंत्री का निजी सचिव और फिर मुख्य सचिव बन गया। बनर्जी ने इस घटनाक्रम को अनुचित कार्रवाई से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे मामलों में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि किसी अधिकारी के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं तो केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अपनी भूमिका और फैसलों का जवाब देना चाहिए।बनर्जी का निशाना केवल किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पूरे चुनावी तंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनाव कराने वाली संस्था की विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट सुरक्षित है और मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव निष्पक्ष नियमों के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा विवादों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष की नाराजगी
दरअसल, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की नाराजगी की एक बड़ी वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने का काम किया जाता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और कई जगह वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया है कि मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक फैसले किस स्तर पर लिए जा रहे हैं तथा इन फैसलों में सभी चुनाव आयुक्तों की भूमिका कितनी रही है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायतों का निष्पक्ष तरीके से समाधान करना चाहिए।भारतीय एक्सप्रेस की 23 सितंबर को प्रकाशित एक पड़ताल में बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें नए मतदाताओं को जोड़ने, चुनावी डेटाबेस तक पहुंच को केंद्रीकृत करने और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित अपीलों जैसे मुद्दे शामिल थे।हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अपना पक्ष भी रखा था। 24 सितंबर को जारी अपने बयान में आयोग ने कहा था कि किसी भी संस्थान में सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। आयोग ने यह भी कहा था कि आंतरिक टिप्पणियों और तकनीकी सुझावों को पूरी प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
19 विपक्षी दलों ने भी खोला मोर्चा
रविवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध और तेज हो गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में 19 विपक्षी दलों ने सांकेतिक महाभियोग की प्रक्रिया अपनाते हुए उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। इस कार्यक्रम में 250 से अधिक विपक्षी सांसदों ने हिस्सा लिया। प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची में बदलाव और आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। विपक्ष ने उन्हें तत्काल पद से हटाने और मामले की जांच कराने की मांग की।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह केवल चर्चा नहीं, बल्कि देश के युवाओं और आम लोगों को न्याय दिलाने के लिए उठाया गया राजनीतिक कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत दुश्मनी रखना नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक गरिमा को बनाए रखना है।
 बीजेपी ने विपक्ष के कदम को बताया राजनीतिक नाटक
विपक्ष की इस पहल पर भारतीय जनता पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब पूर्व में कांग्रेस की सरकारों के दौरान चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियां हुई थीं, तब चुनावी नतीजों को लेकर ऐसे सवाल क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने विपक्ष से यह भी पूछा कि मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और दोहरे नामों को हटाने की प्रक्रिया को क्या गलत माना जाना चाहिए।वहीं, बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के इस कार्यक्रम को लोकतांत्रिक संस्थाओं का मजाक बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मॉक पार्लियामेंट के नाम पर राजनीतिक नाटक कर रहे हैं। इस तरह बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दा बताया।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जारी रहेगी बहस
कल्याण बनर्जी का ताजा बयान और विपक्षी दलों की सामूहिक पहल यह संकेत देती है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर विपक्ष SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान करार दे रही है।इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे का है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, इसलिए उसके फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब तथ्यों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर सामने आना जरूरी है। फिलहाल कल्याण बनर्जी की इस्तीफे की मांग ने इस राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
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