नई दिल्ली। दिवाली और त्योहारों के मौसम से पहले केंद्र सरकार ने देश के राज्यों को बड़ी वित्तीय राहत दी है। केंद्र ने राज्यों को कुल 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी जारी की है। इस राशि से राज्यों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने के साथ ही विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को जारी की गई यह राशि राज्यों को मिलने वाले नियमित मासिक टैक्स हस्तांतरण के अतिरिक्त है। चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई यह दूसरी अतिरिक्त किस्त है। इस फैसले से देश के सभी 28 राज्यों को फायदा होगा। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 19,208 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि बिहार को 10,845 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। कर्नाटक के हिस्से में 4,504 करोड़ रुपये आए हैं। वहीं छत्तीसगढ़ को 3,602 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मिली है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार, त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को अग्रिम रूप से यह अतिरिक्त राशि जारी की गई है। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों को अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे पूंजीगत खर्च में तेजी ला सकें। इसके अलावा विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए भी धन की उपलब्धता बनी रहे। केंद्र सरकार आमतौर पर निर्धारित व्यवस्था के तहत प्रत्येक महीने राज्यों को केंद्रीय करों में उनकी हिस्सेदारी हस्तांतरित करती है। हालांकि, इस बार नियमित मासिक किस्त से अलग अतिरिक्त राशि पहले ही जारी कर दी गई है।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, राज्यों को दी गई इस अतिरिक्त राशि से बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। सड़क, पुल, परिवहन, बिजली, पेयजल और शहरी विकास जैसी परियोजनाओं पर राज्य सरकारें अधिक खर्च कर सकेंगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण से संबंधित योजनाओं के संचालन में भी आर्थिक सहायता मिलेगी। त्योहारों के दौरान राज्य सरकारों पर विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में अतिरिक्त राशि से उनके पास उपलब्ध नकदी की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।

इस बार जारी की गई रकम में सबसे ज्यादा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है। राज्य को 19,208 करोड़ रुपये दिए गए हैं। दूसरे स्थान पर बिहार है, जिसे 10,845 करोड़ रुपये मिले हैं। मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। महाराष्ट्र के खाते में 7,022 करोड़ रुपये आए हैं, जबकि राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इन बड़े राज्यों को मिली राशि से उनकी विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं को आर्थिक सहयोग मिलने की उम्मीद है।

दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों को भी अच्छी-खासी राशि मिली है। ओडिशा को 4,819 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 4,597 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 4,504 करोड़ रुपये और तमिलनाडु को 4,466 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। गुजरात को 4,094 करोड़ रुपये, झारखंड को 3,660 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ को 3,602 करोड़ रुपये मिले हैं। असम को 3,552 करोड़ रुपये, केरल को 2,597 करोड़ रुपये और तेलंगाना को 2,370 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

वहीं पंजाब को 2,176 करोड़ रुपये, हरियाणा को 1,484 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश को 1,476 करोड़ रुपये और उत्तराखंड को 1,244 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश को 996 करोड़ रुपये मिले हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में त्रिपुरा को 699 करोड़ रुपये, मेघालय को 688 करोड़ रुपये, मणिपुर को 682 करोड़ रुपये, मिजोरम को 615 करोड़ रुपये और नागालैंड को 524 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सिक्किम को 365 करोड़ रुपये तथा गोवा को 398 करोड़ रुपये मिले हैं।

इस वित्तीय हस्तांतरण में छत्तीसगढ़ को मिले 3,602 करोड़ रुपये भी महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार इस राशि का उपयोग विकास और जनकल्याण से संबंधित विभिन्न योजनाओं तथा बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में कर सकती है। प्रदेश में सड़क निर्माण, शहरी सुविधाओं के विस्तार, ग्रामीण विकास, पेयजल व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे। हालांकि, किस योजना या विभाग में कितनी राशि खर्च की जाएगी, इसका फैसला राज्य सरकार अपने बजट और प्राथमिकताओं के अनुसार करेगी।

यहां समझना जरूरी है कि केंद्र की ओर से जारी की गई राशि कोई नया कर्ज या राज्यों के लिए अलग से घोषित अनुदान नहीं है। यह केंद्रीय करों और शुल्कों से राज्यों को मिलने वाली उनकी निर्धारित हिस्सेदारी का अतिरिक्त अग्रिम हस्तांतरण है। इसे नियमित मासिक टैक्स हिस्सेदारी से अलग समय पर जारी किया गया है। यानी राज्यों को मिलने वाली सामान्य मासिक राशि के अलावा यह अतिरिक्त रकम उनके खातों में पहुंचाई गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस अतिरिक्त किस्त को मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर टैक्स संग्रह से जुड़ा बताया है। सरकार का मानना है कि राज्यों को समय से अतिरिक्त संसाधन मिलने से पूंजीगत निवेश बढ़ेगा। इसका फायदा केवल सरकारी परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्माण, परिवहन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह फैसला राज्यों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राज्य सरकारें इस अतिरिक्त राशि का इस्तेमाल किस तरह अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार करती हैं और इसका लाभ आम लोगों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।

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