जेआरडी टाटा: बतौर इंटर्न टाटा ग्रुप में हुए थे शामिल, दशकों तक किया समूह का नेतृत्व
Delhi दिल्ली: जेआरडी टाटा यानी जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा को हमेशा भारत के औद्योगिक जगत में उनके अमूल्य योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने न सिर्फ भारत की पहली कमर्शियल एयरलाइन 'एयर इंडिया' की नींव रखी थी, बल्कि वे भारत के पहले कमर्शियल पायलट भी थे। उन्होंने टाटा ग्रुप को कई अहम क्षेत्रों जैसे एविएशन, होटल और स्टील में बढ़ाने में मदद की। जेआरडी टाटा का जन्म 29 जुलाई, 1904 को पेरिस में हुआ था। वह अपने पिता रतनजी दादाभाई टाटा व माता सुजैने ब्रियरे, जो फ्रांसीसी थी, की दूसरी संतान थे। उनके पिता रतनजी देश के दिग्गज उद्योगपति जमशेदजी टाटा के चचेरे भाई थे।
माता के फ्रांसीसी होने के कारण जेआरडी टाटा का बचपन का एक हिस्सा फ्रांस में भी बीता। इस कारण वह कई भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के मुकाबले फ्रांसीसी अच्छी बोलते थे। जेआरडी टाटा ने कैथेडरल एंड जॉन कोनोन स्कूल मुंबई से प्राथमिक शिक्षा हासिल की है। उसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कैंब्रिज विश्वविद्यालय से की। जेआरडी टाटा ने टाटा ग्रुप में वर्ष 1925 में बतौर इंटर्न काम करना शुरू किया है, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने टाटा एयरलाइन, जो आगे चलकर एयर इंडिया बनी, की नींव रखी, जिसने 15 अक्टूबर 1932 को पहली उड़ान भरी थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेआरडी टाटा ने जब समूह की कमान संभाली थी, तो टाटा ग्रुप करीब 14 उद्योगों में कार्य करता था और 26 जुलाई 1988 को जब उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ा तो टाटा ग्रुप 95 उद्योगों में विस्तार कर चुका था। उन्होंने कई दशकों तक स्टील, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, रसायन के क्षेत्र में टाटा समूह की कंपनियों का नेतृत्व किया। जेआरडी टाटा को कंपनियों का कारोबार बढ़ाने के साथ कर्मचारियों के कल्याण की नीतियों के लिए भी जाना जाता है, जिसमें से कई टाटा ग्रुप में आज भी लागू हैं। उद्योग जगत और भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को देखते सरकार ने 1957 में जेआरडी टाटा को पद्म विभूषण और 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया था।