नई दिल्ली : पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भाजपा की केंद्रीय टीम में वापसी के बाद अपने राजनीतिक सफर और 2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से मिली हार को लेकर खुलकर बात की है। एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने राज्यसभा न भेजे जाने और पार्टी संगठन में भूमिका को लेकर अपनी राय रखी।

स्मृति ईरानी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन में कोई भी पद किसी व्यक्ति की पहचान नहीं होता, बल्कि वह जिम्मेदारी निभाने का एक अवसर होता है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण काम और पार्टी के प्रति समर्पण होता है।

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से मिली हार का जिक्र करते हुए कहा कि अगर राजनीतिक ताकत उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण होती तो वह कभी अमेठी से चुनाव लड़ने नहीं जातीं। उन्होंने कहा कि अमेठी लंबे समय तक भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण सीट रही है।

स्मृति ईरानी ने कहा कि अमेठी को ऐतिहासिक रूप से भाजपा की कमजोर सीट माना जाता था, लेकिन पार्टी ने वहां संघर्ष किया और उन्होंने 2019 के चुनाव में जीत हासिल की। उनके मुताबिक, राजनीति में कठिन चुनौतियों को स्वीकार करना भी जरूरी होता है।

2019 में राहुल गांधी को दी थी मात

स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर अमेठी से खास तौर पर जुड़ा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी। यह जीत भाजपा के लिए भी ऐतिहासिक मानी गई थी, क्योंकि अमेठी लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही थी।

इससे पहले स्मृति ईरानी 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अमेठी से चुनाव मैदान में उतरी थीं, हालांकि उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी उन्होंने क्षेत्र में सक्रियता बनाए रखी और 2019 में जीत हासिल की।

2024 में अमेठी से मिली हार

2024 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को अमेठी सीट पर हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें चुनाव में शिकस्त दी। इस हार के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हुई थी कि क्या उन्हें राज्यसभा के जरिए संसद में भेजा जाएगा।

हालांकि, भाजपा ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। अब स्मृति ईरानी ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियां समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती हैं।

उन्होंने कहा कि संगठन में मिलने वाला हर अवसर काम करने का माध्यम होता है। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि भाजपा में कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

2011 से 2019 तक रहीं राज्यसभा सांसद

स्मृति ईरानी वर्ष 2011 से 2019 तक राज्यसभा सांसद रही थीं। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय समेत कई विभागों की मंत्री रहीं।

2019 में अमेठी से जीत के बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा था। केंद्र सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई थी।

संगठन में नई भूमिका

भाजपा की केंद्रीय टीम में वापसी के बाद स्मृति ईरानी अब संगठनात्मक जिम्मेदारियों में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में काम करने के कई अवसर मिलते हैं और हर भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि राजनीति में व्यक्ति को लगातार सीखते रहना चाहिए और जनता तथा संगठन के लिए काम करते रहना चाहिए। उनके अनुसार, पद आने-जाने वाली चीज है, लेकिन पार्टी और विचारधारा के प्रति जिम्मेदारी स्थायी होती है।

राजनीतिक सफर पर रखी बात

पॉडकास्ट के दौरान स्मृति ईरानी ने अपने राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा चुनौतियों को स्वीकार किया है। अमेठी जैसे क्षेत्र से चुनाव लड़ना भी उनके लिए एक चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे अवसर के रूप में लिया।

उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता और असफलता दोनों आती हैं। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति किस तरह परिस्थितियों का सामना करता है और आगे बढ़ता है।

स्मृति ईरानी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर उनके भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा संगठन में उनकी वापसी के बाद अब उनकी नई जिम्मेदारियों पर भी नजर बनी हुई है।

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