भारत का शिक्षा तंत्र सीखने वालों पर केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार: प्रह्लाद जोशी

Update: 2026-08-08 09:19 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत का शिक्षा इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है और अब यह “सीखने वालों पर केंद्रित, रिसर्च पर आधारित और भविष्य के लिए तैयार” हो गया है। उन्होंने कहा कि देश के युवा अब केवल दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता भी दिखा रहे हैं।

जोशी ने यह बात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन के दौरान कही। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया और डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बाद पहला सार्वजनिक कार्यक्रम

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बाद किसी शिक्षण संस्थान में यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए विशेष अवसर है।

उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बाद, किसी भी शिक्षण संस्थान में यह मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है और वह भी PM मोदी के साथ। मैं बहुत खुश हूं और आप सभी का आशीर्वाद पाकर धन्य महसूस कर रहा हूं।”

जोशी ने IIT दिल्ली के विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्थान से जुड़े सभी लोगों को दीक्षांत समारोह की बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी के जीवन में दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, क्योंकि इसके बाद वह अपनी शिक्षा और प्रशिक्षण को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों में इस्तेमाल करने के लिए आगे बढ़ता है।

युवाओं को विकसित भारत का मुख्य निर्माता बताया

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के युवाओं के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा देश की युवा शक्ति पर भरोसा किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री युवाओं को “विकसित भारत 2047 का मुख्य निर्माता” मानते हैं। जोशी के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी बड़ी संख्या में युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और पेशेवरों के कंधों पर होगी।

उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल देश की समस्याओं के समाधान के लिए करने की अपील की। उनके मुताबिक, भारत के सामने ऊर्जा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, डिजिटल तकनीक और उन्नत विनिर्माण जैसे कई क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियां और अवसर मौजूद हैं।

उच्च शिक्षा में बढ़ी भागीदारी

प्रह्लाद जोशी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश में 4.5 करोड़ से अधिक छात्र उच्च शिक्षा में नामांकित हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से देश में विश्वविद्यालयों की संख्या में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों और विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में शिक्षा तक पहुंच लगातार व्यापक हो रही है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी है। इसी दिशा में रिसर्च, इनोवेशन और तकनीकी शिक्षा को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

रिसर्च और इनोवेशन पर जोर

जोशी ने कहा कि भारत के शिक्षा तंत्र में शोध और नवाचार को लगातार मजबूत किया जा रहा है। IIT जैसे संस्थान देश के तकनीकी और वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा को केवल नौकरी प्राप्त करने का माध्यम न मानें। नई तकनीक और शोध के माध्यम से देश के सामने मौजूद समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में काम करना भी उनकी जिम्मेदारी है।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों में भारत के युवाओं के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाकर भारत वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहे युवा

जोशी ने कहा कि भारत के युवा अब दुनिया के साथ सिर्फ मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं, बल्कि वे कई क्षेत्रों में नेतृत्व करने की क्षमता भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं की प्रतिभा देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारतीय पेशेवर अपनी पहचान बना रहे हैं।

उन्होंने छात्रों से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ भारत की जरूरतों को भी ध्यान में रखने की अपील की। उनके मुताबिक, देश में उपलब्ध प्रतिभा और तकनीकी क्षमता का उपयोग भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में किया जाना चाहिए।

IIT दिल्ली के छात्रों को नई जिम्मेदारी का संदेश

दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए यह अवसर उनके अकादमिक जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन और नई यात्रा की शुरुआत है। जोशी ने छात्रों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि अब उनके सामने समाज और देश के लिए योगदान करने की नई जिम्मेदारी है।

उन्होंने छात्रों को लगातार सीखते रहने और बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भविष्य की दुनिया में वही लोग सफल होंगे जो नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और नए समाधान खोजने की क्षमता रखते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हुआ समारोह

IIT दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के कारण भी खास रहा। प्रधानमंत्री ने समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मानित किया और विद्यार्थियों को संबोधित किया।

समारोह में शिक्षा, तकनीक, रिसर्च और देश के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश सामने आए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भारत के शिक्षा क्षेत्र में हो रहे विस्तार और युवाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था अब केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित नहीं है। रिसर्च, इनोवेशन, डिजिटल तकनीक और उद्योग की जरूरतों के साथ तालमेल बनाकर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो भारत के युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सके।

प्रह्लाद जोशी का संदेश साफ था कि भारत की विकास यात्रा में शिक्षा और युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो ज्ञान, तकनीक और नवाचार के साथ वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने का आत्मविश्वास रखते हों।

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