नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण ‘सेमीकॉन 2.0’ को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस चरण में सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन के क्षेत्र में कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को आगे बढ़ाना है।
उन्होंने यह घोषणा ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के उद्घाटन सत्र के दौरान की। वैष्णव ने कहा कि चिप डिजाइन को सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम के छह प्रमुख स्तंभों में पहला स्थान दिया गया है।
चिप डिजाइन बनेगा मिशन का प्रमुख आधार
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग में चिप डिजाइन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अब केवल निर्माण क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि डिजाइन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के तहत चिप डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पहले चरण में 105 स्टार्टअप ने किया काम
मंत्री ने बताया कि सेमीकंडक्टर मिशन के पिछले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप ने चिप डिजाइन के क्षेत्र में काम शुरू किया।
इनमें से करीब 20 स्टार्टअप को वेंचर कैपिटल निवेश भी मिला है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता को बढ़ावा मिला है।
नए चरण में बढ़ेगा दायरा
सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार पहले चरण की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
इस कार्यक्रम के जरिए अधिक संख्या में स्टार्टअप, डिजाइन कंपनियों और तकनीकी संस्थानों को जोड़ने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करे।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर
सेमीकंडक्टर आज के डिजिटल युग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और कई आधुनिक तकनीकों में चिप का इस्तेमाल होता है।
भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
सरकार का मानना है कि मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम देश की तकनीकी क्षमता और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा।
स्टार्टअप को मिलेगा प्रोत्साहन
सेमीकॉन 2.0 के तहत स्टार्टअप को डिजाइन, रिसर्च और विकास के क्षेत्र में सहायता देने की योजना है।
मंत्री ने कहा कि चिप डिजाइन के क्षेत्र में नए विचारों और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है।
इसके लिए सरकार उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ाने पर काम कर रही है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में हुई चर्चा
‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ, कंपनियां और नीति निर्माता शामिल हुए।
कार्यक्रम में भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति, निवेश, उत्पादन क्षमता और तकनीकी विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस दौरान भारत को वैश्विक चिप सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका दिलाने पर जोर दिया गया।
छह स्तंभों पर आधारित होगा सेमीकॉन 2.0
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा।
इनमें चिप डिजाइन को सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा उत्पादन, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्योग सहयोग जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका
दुनिया में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
सरकार का कहना है कि सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से देश में रोजगार, निवेश और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
आगे की रणनीति पर नजर
सेमीकॉन 2.0 के तहत 200 स्टार्टअप और कंपनियों को चिप डिजाइन क्षेत्र में आगे बढ़ाने का लक्ष्य भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।
सरकार अब पहले चरण से मिली सीख और उपलब्धियों के आधार पर अगले चरण की योजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।