नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अपने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि देश ने बीते चार वर्षों में इस क्षेत्र में वह प्रगति हासिल की है, जिसे पूरा करने में आमतौर पर दुनिया के कई देशों को एक दशक तक का समय लग जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग, निवेश, निर्माण क्षमता और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की।

सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने अपने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि मिशन के पहले चरण की अनुमानित वैल्यू करीब 8 अरब डॉलर थी, जबकि दूसरे चरण के लिए भारत ने 13.5 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में केवल क्षमता निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कमर्शियल प्रोडक्शन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करना चाहता है।

चार साल में तेज प्रगति का दावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से काम किया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर की उपलब्धियां हासिल करने में कई देशों को लंबा समय लगता है, भारत ने उन्हें कम समय में हासिल करने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों, निवेश योजनाओं और सुधारों के कारण भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

विदेशी कंपनियों और भारतीय स्टार्टअप्स के सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, भारतीय स्टार्टअप्स और भारतीय डिजाइन फर्मों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने कहा कि अब इंटरनेशनल कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स, डिजाइन कंपनियों और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) के स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ मिलकर काम कर सकती हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में निवेश और साझेदारी को आसान बनाने के लिए नीतिगत स्तर पर लगातार काम कर रही है।

नीति, फंडिंग और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर फोकस

प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए सरकार नीति, वित्तीय सहायता और नियामकीय ढांचे में सुधार कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों और कंपनियों को ऐसा वातावरण मिले, जिससे वे अपने प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा सकें।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस क्षेत्र में आने वाली कंपनियों को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र क्यों है महत्वपूर्ण

सेमीकंडक्टर चिप आधुनिक तकनीक का अहम हिस्सा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, स्वास्थ्य तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सिस्टम में इनका उपयोग होता है।

दुनिया में चिप निर्माण को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और कई देश अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

भारत भी इसी दिशा में अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के जरिए बदलाव का दावा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार लगातार सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में कारोबार को आसान बनाने और तकनीकी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई बदलाव किए हैं।

भारत को वैश्विक केंद्र बनाने की तैयारी

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल सेमीकंडक्टर का उपभोक्ता बनना नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र में एक मजबूत निर्माता और नवाचार केंद्र के रूप में उभरना है।

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग में विकास से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे और देश की तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का महत्व

‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ, कंपनियों के प्रतिनिधि और निवेशक शामिल हो रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण, डिजाइन, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की युवा प्रतिभा और तकनीकी क्षमता इस क्षेत्र में देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब दूसरे चरण में पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य निवेश, निर्माण और तकनीकी साझेदारी के जरिए देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में मजबूत स्थान दिलाना है।

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