नई दिल्ली। UPI पेमेंट पर संभावित फीस को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने गुरुवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में शामिल उसके सांसदों ने अधिक मूल्य वाले UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था।

कांग्रेस ने कहा कि उसके सांसदों ने ऐसा कोई समर्थन नहीं दिया है। पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस ने दावों को बताया गलत

कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में उसके सदस्यों ने UPI भुगतान पर शुल्क लगाने के किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है।

पार्टी ने सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह लोगों को भ्रमित करने का प्रयास है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष पर गलत आरोप लगा रही है।

हालांकि, समिति की बैठकों और चर्चाओं से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं।

राहुल गांधी ने उठाया था UPI फीस का मुद्दा

यह विवाद उस समय सामने आया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की संभावित व्यवस्था का विरोध किया था।

राहुल गांधी ने कहा था कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI एक महत्वपूर्ण माध्यम बना है और इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे व्यापारियों और आम लोगों पर असर पड़ सकता है।

उनके बयान के बाद सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आई और संसदीय समिति का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए गए।

सरकार ने समिति की चर्चा का दिया हवाला

सरकार की ओर से कहा गया कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में UPI लेनदेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। सरकार ने दावा किया कि समिति के कुछ सुझावों में बड़े मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था को लेकर विचार किया गया था।

इसी को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और कहा कि समिति की चर्चा और किसी प्रस्ताव का समर्थन करने में अंतर होता है।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर बहस

भारत में UPI डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।

UPI के जरिए भुगतान की सुविधा आसान और तेज होने के कारण इसका उपयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में किसी भी तरह के शुल्क या फीस से जुड़े मुद्दे पर व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि UPI जैसे लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।

पार्टी का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि UPI भुगतान पर शुल्क लगाने को लेकर उसकी वास्तविक नीति क्या है और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए विपक्ष के खिलाफ गलत प्रचार कर रही है।

UPI और व्यापारियों की चिंता

व्यापारी संगठनों की ओर से भी समय-समय पर डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्क के मुद्दे पर चिंता जताई जाती रही है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कम लागत वाली व्यवस्था जरूरी है।

वहीं, डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने वाली संस्थाओं के लिए भी लागत और संचालन से जुड़े विषय महत्वपूर्ण होते हैं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

UPI फीस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस और सरकार दोनों की ओर से अपने-अपने पक्ष रखे जा रहे हैं।

जहां कांग्रेस इसे आम लोगों और व्यापारियों से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं सरकार की ओर से समिति की चर्चा का हवाला देकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं।

आगे स्थिति होगी स्पष्ट

फिलहाल UPI भुगतान पर शुल्क को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने अपने सांसदों द्वारा समर्थन किए जाने के दावों को खारिज कर दिया है, जबकि सरकार की ओर से संसदीय समिति की चर्चा का उल्लेख किया गया है।

अब इस मामले में आगे सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से आने वाले आधिकारिक स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी।

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