नई दिल्ली। नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और आपदा में प्रभावित लोगों की पहचान के लिए भारत सरकार ने मानवीय सहायता के तहत बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में बरामद शवों की पहचान को आसान बनाने के लिए भारत में मौजूद पीड़ितों के करीबी जैविक रिश्तेदारों की DNA प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार केंद्रीय और राज्य स्तर की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से DNA सैंपल लेने और प्रोफाइल तैयार करने में सहायता करेगी। इससे नेपाल में मिले अज्ञात शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी और पीड़ित परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
करीबी रिश्तेदार दे सकेंगे DNA सैंपल
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत में रहने वाले पीड़ितों के करीबी जैविक रिश्तेदार DNA प्रोफाइलिंग के लिए अपने सैंपल दे सकते हैं। इनमें माता-पिता, बेटा, बेटी और भाई-बहन शामिल हैं।
रिश्तेदार केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) और राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में जाकर अपने जैविक नमूने जमा कर सकते हैं। इन नमूनों के आधार पर DNA प्रोफाइल तैयार की जाएगी, जिसका इस्तेमाल नेपाल में मिले शवों की पहचान के लिए किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि DNA मिलान की प्रक्रिया वैज्ञानिक और विश्वसनीय तरीका है, जिससे बिना पहचान वाले शवों की सही पहचान की जा सकती है।
आपदा के बाद पहचान बनी बड़ी चुनौती
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। कई मामलों में शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है, खासकर तब जब दस्तावेज या अन्य पहचान संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं होती।
ऐसी स्थिति में DNA प्रोफाइलिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परिवार के सदस्यों के DNA नमूनों का मिलान शवों से प्राप्त नमूनों के साथ किया जाता है, जिससे मृतक की पहचान सुनिश्चित की जा सकती है।
भारत ने बढ़ाया सहयोग का हाथ
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय दोनों देशों के बीच सहयोग का सिलसिला भी जारी रहता है।
भारत सरकार की ओर से DNA प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना नेपाल में राहत और पहचान प्रक्रिया में सहयोग का हिस्सा है। इससे प्रभावित परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
कैसे होगी DNA पहचान प्रक्रिया
DNA पहचान के लिए सबसे पहले पीड़ित के करीबी रिश्तेदार का जैविक नमूना लिया जाता है। इसके बाद प्रयोगशाला में DNA प्रोफाइल तैयार की जाती है।
नेपाल में मिले अज्ञात शवों से प्राप्त DNA नमूनों के साथ इस प्रोफाइल का मिलान किया जाता है। यदि दोनों नमूनों में वैज्ञानिक स्तर पर समानता पाई जाती है तो मृतक की पहचान की पुष्टि की जाती है।
यह प्रक्रिया समय ले सकती है, लेकिन आपदा की स्थिति में यह सबसे भरोसेमंद तरीकों में से एक मानी जाती है।
परिवारों के लिए बड़ी राहत
आपदा में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि उन्हें अपने प्रियजन के बारे में सही जानकारी मिल सके। कई बार शवों की पहचान नहीं होने के कारण परिवारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
भारत सरकार की इस पहल से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। DNA प्रोफाइलिंग के जरिए पहचान प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक हो सकेगी।
विदेश मंत्रालय ने की अपील
विदेश मंत्रालय ने भारत में रहने वाले ऐसे लोगों से अपील की है, जिनके परिजन नेपाल बाढ़ आपदा में लापता हैं या जिनकी पहचान नहीं हो पाई है, वे संबंधित फोरेंसिक प्रयोगशालाओं से संपर्क कर DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा पीड़ित परिवारों की सहायता और शवों की पहचान के उद्देश्य से उपलब्ध कराई जा रही है।
नेपाल बाढ़ आपदा के बाद भारत की यह पहल दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग का उदाहरण मानी जा रही है। DNA प्रोफाइलिंग की मदद से जहां एक ओर प्रशासन को पहचान प्रक्रिया में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में निश्चित जानकारी मिल सकेगी।