नई दिल्ली : भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लंबे समय से विभिन्न देशों से तेल और गैस का आयात करता रहा है। बदलते वैश्विक हालात, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के बीच भारत ने अपनी आयात रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा एलपीजी (LPG) आपूर्तिकर्ता देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले से बनाई गई रणनीति का परिणाम है। उनका कहना है कि भारत ने समय रहते आयात के स्रोतों में विविधता लाने का फैसला किया, जिसका लाभ आज देश को मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बहुत छोटा हिस्सा ही अमेरिका से आयात करता था। उस समय सरकार ने अमेरिका से आयात को धीरे-धीरे बढ़ाने की योजना बनाई थी। शुरुआती लक्ष्य अमेरिका से होने वाले ऊर्जा आयात को लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ाने का था। उस समय वैश्विक परिस्थितियां सामान्य थीं और पश्चिम एशिया में मौजूदा स्तर का तनाव भी नहीं था। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदले और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करना शुरू कर दिया। ऐसे समय में भारत का पहले से लिया गया रणनीतिक फैसला काफी उपयोगी साबित हुआ।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि जब भारत सरकार ने अमेरिका से गैस आयात बढ़ाने की योजना बनाई थी, तब कई विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने इस पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका भारत से हजारों किलोमीटर दूर स्थित है और इतनी दूरी से गैस आयात करना आर्थिक दृष्टि से लाभदायक नहीं होगा, जबकि खाड़ी देशों जैसे नजदीकी विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन सरकार ने केवल दूरी नहीं बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी। आज जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला कई चुनौतियों से गुजर रही है, तब अमेरिका से होने वाली एलपीजी आपूर्ति भारत के लिए एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई है।
उन्होंने कहा कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौरान कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, लेकिन भारत ने अपनी आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया। अमेरिका से बढ़ती एलपीजी आपूर्ति ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिली बल्कि देश में गैस वितरण प्रणाली भी बिना किसी बड़े व्यवधान के संचालित होती रही।
केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि भारत की नीति किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रहने की नहीं है। सरकार लगातार ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रही है ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों। इसी रणनीति के तहत भारत खाड़ी देशों के साथ-साथ रूस, अमेरिका और अन्य देशों से भी कच्चा तेल एवं गैस का आयात कर रहा है।
रूस से कच्चे तेल के आयात का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी कारण रूस से तेल आयात जारी रखा गया। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित हुई और आपूर्ति श्रृंखला स्थिर बनी रही।
रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्गों पर तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार उपलब्ध है। वर्तमान में देश के पास लगभग 75 दिनों की पेट्रोलियम जरूरतों को पूरा करने लायक भंडार मौजूद है। यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति की मजबूती को दर्शाती है। दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल भारत के लिए इतना बड़ा रणनीतिक भंडार भविष्य की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में आयात के विभिन्न स्रोत विकसित करना, दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते करना और रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाना देश की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। अमेरिका के सबसे बड़े एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनने के साथ भारत की ऊर्जा नीति में एक नया अध्याय जुड़ा है, जो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित वैश्विक चुनौतियों के बीच भी देश की ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।