दिल्ली : केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर बड़ा दावा किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत ने दुनिया के 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में सफलता हासिल की है। इनमें 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भी शामिल है। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और समन्वित बनाया गया है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार अपराधियों को भारत लाने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
गृह मंत्रालय ने बताया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू होने के बाद भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब खुफिया सूचनाओं, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के आधार पर एकीकृत अभियान चलाया जा रहा है। इसके जरिए आतंकवाद, आर्थिक अपराध, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, हत्या, बलात्कार, पॉक्सो और गैंगस्टर गतिविधियों में शामिल वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया तेज हुई है।
मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2004 से 2013 के बीच पूरे दशक में केवल चार भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण हो पाया था। उस समय प्रत्यर्पण संबंधी कानून पुराने थे और भारत की केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। कई मामलों में अधूरे दस्तावेज, लंबी कानूनी प्रक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण विदेशी अदालतें भारत के अनुरोधों को स्वीकार नहीं करती थीं। इसके अलावा दोहरे अपराध और दोहरे अभियोजन जैसे कानूनी सिद्धांत भी प्रत्यर्पण प्रक्रिया में बड़ी बाधा बनते थे।
सरकार का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। सरकार ने वैश्विक अभियान, मजबूत अंतरराष्ट्रीय समन्वय और सक्रिय कूटनीति पर विशेष जोर दिया है। गृह मंत्रालय का दावा है कि इसी रणनीति के चलते कई वर्षों से विदेशों में छिपे अपराधियों को भी भारत लाने में सफलता मिली है।
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का इस्तेमाल आतंकवाद, नार्को-टेरर नेटवर्क और सीमा पार से संचालित गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। ऐसे मामलों की निगरानी और समन्वय को मजबूत करने के लिए जनवरी 2026 में खुफिया ब्यूरो के मल्टी एजेंसी सेंटर के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन किया गया, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और कार्रवाई में तेजी आई।
सरकार ने वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) संशोधन अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए में संशोधन कर आतंकवाद से जुड़े मामलों में कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। इसके बाद वर्ष 2020 से भगोड़ों के खिलाफ अभियान को मिशन मोड में संचालित किया जाने लगा। अब कार्रवाई केवल प्रतिबंधित संगठनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यक्तिगत आतंकियों, उनके हैंडलरों, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में मौजूद सहयोगियों तक भी पहुंच बनाई गई।
वर्ष 2024 में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों में भी भगोड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार अनुपस्थिति में मुकदमे चलाने की व्यवस्था की गई है। इससे यदि कोई आरोपी विदेश में फरार है और अदालत में उपस्थित नहीं होता, तब भी उसके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत ने वर्ष 2022 में इंटरपोल की 90वीं महासभा की मेजबानी की थी। इसके बाद जनवरी 2025 में 'भारतपोल' पहल की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस और जिला स्तर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से जोड़ा गया। गृह मंत्रालय का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में काफी तेजी आई है। पहले जहां जानकारी साझा करने में कई सप्ताह लगते थे, वहीं अब कई मामलों में यह प्रक्रिया 3 से 10 दिनों के भीतर पूरी हो रही है।
सरकार ने आर्थिक अपराधियों पर भी सख्ती बढ़ाई है। मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की लगभग 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं, जबकि 18,762 करोड़ रुपये की संपत्तियों और धन की सफल रिकवरी भी की गई। इसके अलावा सीबीआई ने इंटरपोल के सहयोग से विशेष वैश्विक संचालन केंद्र स्थापित किए हैं, जो दुनिया भर की पुलिस एजेंसियों के साथ वास्तविक समय में समन्वय कर भगोड़ों की तलाश और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का कहना है कि 'ऑपरेशन त्रिशूल' जैसे अभियानों के जरिए आने वाले समय में भी फरार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी।