पीएम मोदी के जन्मदिन पर कोयला श्रमिकों को विशेष संदेश देंगे जी किशन रेड्डी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी कोयला श्रमिकों के नाम विशेष संदेश जारी करेंगे। इसमें कोयला क्षेत्र में कार्यरत नियमित कर्मचारियों और संविदा श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षा तथा आर्थिक संरक्षण से जुड़ी प्रमुख सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम का केंद्र श्रमिकों और उनके परिवारों को उपलब्ध कराए जा रहे बीमा तथा अनुग्रह सहायता जैसे उपाय रहेंगे।
विशेष संदेश में नियमित कोयला कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और संविदा श्रमिकों को 40 लाख रुपये तक बीमा सुरक्षा की सुविधा का उल्लेख किया जाएगा। खदान दुर्घटना में किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किए जाने की जानकारी भी श्रमिकों के साथ साझा की जाएगी।
हालांकि, इन सुविधाओं को 2026 में पहली बार शुरू की जाने वाली नई योजनाओं के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। कोयला मंत्रालय ने इन कल्याणकारी उपायों की घोषणा सितंबर 2025 में ही की थी। अब प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर जारी होने वाले संदेश में इन पहलों और उनके लाभों को प्रमुखता से रेखांकित किए जाने की बात सामने आई है।
नियमित कर्मचारियों को एक करोड़ का बीमा
कोयला मंत्रालय के अनुसार, कॉरपोरेट सैलरी पैकेज के तहत नियमित कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया गया है। यह बीमा कर्मचारियों और उनके परिवारों को आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया।
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कर्मचारी को अलग से बीमा प्रीमियम का भुगतान नहीं करना पड़ता। इसे सार्वजनिक क्षेत्र के दस प्रमुख बैंकों और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के साथ हुए समझौते के माध्यम से लागू किया गया है। बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के कारण कर्मचारियों को वेतन खाते के माध्यम से संबंधित सुविधाएं मिलती हैं।
सितंबर 2025 में जारी सरकारी जानकारी के मुताबिक उस समय 2.15 लाख से अधिक नियमित कर्मचारी इस व्यवस्था में शामिल किए जा चुके थे। योजना के तहत मिलने वाली वास्तविक राशि संबंधित पात्रता, दुर्घटना की प्रकृति और बीमा शर्तों के आधार पर निर्धारित होगी। पत्र सूचना कार्यालय की आधिकारिक विज्ञप्ति
संविदा श्रमिकों को 40 लाख तक सुरक्षा
कोयला क्षेत्र में संविदा श्रमिक बड़ी संख्या में खदानों, परिवहन, रखरखाव और अन्य कार्यों में योगदान देते हैं। जोखिम वाले काम में उनकी भूमिका को देखते हुए उनके लिए भी दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की गई है। कॉरपोरेट सैलरी पैकेज के तहत संविदा श्रमिकों को 40 लाख रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सरकार के अनुसार सितंबर 2025 तक लगभग 44 हजार संविदा श्रमिक इस बीमा व्यवस्था में पंजीकृत किए जा चुके थे। पहली बार संविदा श्रमिकों को इतने व्यापक स्तर पर औपचारिक दुर्घटना बीमा सुरक्षा से जोड़ने का दावा किया गया था। इस सुविधा का उद्देश्य दुर्घटना से प्रभावित श्रमिक परिवार को अचानक उत्पन्न होने वाले आर्थिक संकट से बचाना है।
नियमित और संविदा कर्मचारियों के बीच सुरक्षा सुविधाओं की असमानता लंबे समय से श्रमिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण विषय रही है। संविदा श्रमिकों को बीमा दायरे में शामिल करना इसी अंतर को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है।
अनुग्रह राशि बढ़कर हुई 25 लाख
कोल इंडिया की ‘वी केयर’ पहल के अंतर्गत खदान दुर्घटना में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बढ़ी हुई अनुग्रह राशि नियमित और संविदा दोनों श्रेणी के श्रमिकों पर समान रूप से लागू होती है।
यह राशि मृतक कर्मचारी के परिवार को सीधे प्रदान किए जाने का प्रावधान है, ताकि सहायता पहुंचाने में अनावश्यक देरी न हो। यह भुगतान दुर्घटना बीमा से अलग कल्याणकारी सहायता है। किसी पात्र मामले में बीमा राशि और अनुग्रह सहायता के दावों का निपटारा उनके अलग-अलग नियमों तथा प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा।
कोयला मंत्रालय का कहना है कि खदानों में ‘शून्य नुकसान’ यानी दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकना सर्वोच्च लक्ष्य है। इसके बावजूद किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में प्रभावित परिवार को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है।
सुरक्षा और सम्मान पर विशेष जोर
कोयला खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों को कठिन तथा जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। भूमिगत और खुली खदानों में मशीनों का संचालन, भारी वाहनों की आवाजाही और खनन गतिविधियां सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील होती हैं। ऐसे में बीमा और अनुग्रह राशि कर्मचारियों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम कर सकती हैं।
इसके साथ ही दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण, उपकरणों की जांच, जोखिम मूल्यांकन और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन जरूरी है। केवल आर्थिक सहायता को श्रमिक सुरक्षा का विकल्प नहीं माना जा सकता। श्रमिक संगठनों और विशेषज्ञों का जोर इस बात पर रहता है कि खदान स्तर पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए जिम्मेदारी और निगरानी को मजबूत किया जाए।
कर्मचारियों के लिए नई वर्दी की व्यवस्था भी पूर्व में लागू की गई थी। इसका उद्देश्य कर्मचारियों में साझा पहचान, पेशेवर कार्य संस्कृति और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया गया। भूमिगत खदानों से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक कर्मचारियों के बीच संगठन से जुड़ाव और सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया है।
श्रमिकों तक स्पष्ट जानकारी पहुंचाना जरूरी
विशेष संदेश के माध्यम से कर्मचारियों को कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिलने से उनकी पहुंच इन लाभों तक बढ़ सकती है। कई बार पात्र कर्मचारी और उनके परिवार प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण बीमा या सहायता का दावा समय पर दाखिल नहीं कर पाते। इसलिए योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, दावा प्रक्रिया और नोडल अधिकारी की जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
17 सितंबर को जारी होने वाले संदेश में कोयला श्रमिकों के योगदान को सम्मान दिए जाने की उम्मीद है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोयला क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस व्यवस्था की बुनियाद खदानों में कार्यरत कर्मचारी हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा परिवारों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना सरकार और कोयला कंपनियों की प्रमुख जिम्मेदारी मानी जाती है।